MP Excessive Courtroom: रतलाम के सिविक सेंटर के 22 प्लाटों की रजिस्ट्री शून्य करने के फैसले पर हाई कोर्ट की रोक
MP Excessive Courtroom: नगर निगम परिषद ने साधारण सम्मेलन में निर्णय लिया था। प्रभावित पक्ष की याचिका पर कोर्ट ने निगम से मांगा जवाब।
By Hemraj Yadav
Publish Date: Fri, 22 Mar 2024 10:07 PM (IST)
Up to date Date: Fri, 22 Mar 2024 10:07 PM (IST)

MP Excessive Courtroom: नईदुनिया प्रतिनिधि, रतलाम। सात मार्च को हुए नगर निगम के साधारण सम्मेलन में परिषद द्वारा सिविक सेंटर के 22 प्लाटों की रजिस्ट्री शून्य करवाने के निर्णय पर हाई कोर्ट की इंदौर बेंच से रोक लग गई है। हाई कोर्ट जज प्रणय वर्मा ने शुक्रवार को दिए आदेश में अगली सुनवाई तक रोक लगाने के साथ ही नगर निगम को नोटिस जारी करने के भी निर्देश दिए हैं। स्टे मिलने के बाद अब निगम के जवाब से आगे की कार्रवाई तय होगी।

मालूम हो कि नगर निगम की योजना क्रमांक 71 सिविक सेंटर में वर्ष 1998 में आवंटित 22 प्लाटों की रजिस्ट्री निगम प्रशासन ने 2023 व जनवरी 2024 में करवाई थी। सात मार्च को सम्मेलन में भाजपा पार्षद रत्नदीप सिंह राठौर, नेता प्रतिपक्ष शांतिलाल वर्मा सहित पक्ष व विपक्ष के अन्य पार्षदों ने इसे गलत ठहराते हुए निगम को आर्थिक हानि होने का हवाला दिया। सर्वसम्मति से रजिस्ट्री शून्य कराने की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था।
राज्य शासन ने आयुक्त को कर दिया था निलंबित
सम्मेलन में आयुक्त एपीएस गहरवार ने परिषद को बताया था कि हाईकोर्ट के 2009 में हुए फैसले के बाद अवमानना याचिका लगने पर रजिस्ट्री करानी पड़ी। सिविक सेंटर की जमीन नजूल की होने से नजूल विभाग में तीन करोड़ 98 लाख 50 हजार 799 रुपये जमा कराए गए। प्लाट की रजिस्ट्री पर निगम को करीब 2.5 करोड रुपये मिले। मामले में राज्य शासन ने तत्कालीन आयुक्त एपीएस गहरवार को निलंबित कर दिया था। वहीं रजिस्ट्री कराने वाले उपायुक्त विकास सोलंकी से परिषद ने अविश्वास प्रस्ताव पारित कर अतिरिक्त शाखाओं का कार्य ले लिया था।
निगम का कानूनी पक्ष कमजोर हुआ
कानूनी जानकार परिषद के फैसले को शुरू से ही कमजोर बता रहे थे। नगर निगम से प्लाट खरीदने वाले 22 खरीदारों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि पूर्व में हाई कोर्ट में लगाई याचिका पर हुए आदेश व शासन से मिली स्वीकृति के बाद निगमायुक्त ने सुनवाई कर रजिस्ट्री करवाई है। इसमें परिषद को इस तरह के निर्णय का अधिकार ही नहीं है।
निगम के जवाब पर रहेगी नजर
इधर कानूनी जानकारों का भी कहना है कि रजिस्ट्री शून्य करने की प्रक्रिया सिविल कोर्ट से ही हो सकती है। निगमायुक्त ने जो रजिस्ट्री कराई थी उसमें पूर्व में हाई कोर्ट में हुए निर्णय को आधार बनाया गया है, ऐसे में अब नोटिस मिलने के बाद निगम द्वारा पेश किए जाने वाले जवाब पर सबकी नजर रहेगी।


