पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर में गुरुवार को विद्रोह के 66 वें दिन प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी ज़ुल्म बर्बरता के ख़िलाफ़ सविनय अवज्ञा की घोषणा की है. जिसके तहत अब से पीओके में ना ही पीओके की जनता बिजली का बिल जमा करेगी, ना ही पानी का बिल जमा करेगी और ना ही गैस का.
साथ ही पूरे पीओके में इनकम टैक्स भी नहीं जमा किए जाएंगे. अवामी एक्शन कमेटी के सदस्य इम्तियाज़ असलम ने ऐलान करते हुए पीओके के लोगों से अपील की पाकिस्तानी सेना की बर्बरता के ख़िलाफ़ ऐसा फ़ैसला लिया गया है, साथ ही पीओके के व्यापारियों से अपील की गई कि पूरे पीओके में कोई भी व्यापारी आज से और अभी से इनकम टैक्स देना बंद कर दे.
इसके अलावा प्रदर्शनकारियों की संस्था अवामी एक्शन कमेटी ने ऐलान किया संयुक्त राष्ट्र के 1948 के रेजोल्यूशन के तहत पीओके में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता का संयुक्त राष्ट्र संज्ञान ले. अवामी एक्शन कमेटी के मुताबिक पीओके एक विवादित इलाका है और जिस तरह से पाकिस्तानी सेना लगातार लोगों पर गोलीबारी कर रही है और खाने के सामान रोक रखा है, ऐसे में पाकिस्तान अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकामयाब है.
अवामी एक्शन कमेटी के मुताबिक, पीओके में 1948 के संयुक्त राष्ट्र के रेजोल्यूशन के मुताबिक जनमत संग्रह होना था जिसे पाकिस्तान ने अब तक नहीं करवाया है. गुरुवार को पीओके के मंढोल में महिलाओं ने पाकिस्तानी बर्बरता के खिलाफ प्रदर्शन किया और विद्रोह के एपिसेंटर रावलाकोट में 90 हज़ार की भीड़ ने विद्रोह किया.
27 जुलाई से प्रदर्शनकारी रावलाकोट के चिनार चौक और डी चौक पर बैठे हैं, लेकिन जगह की कमी की वजह से रावलकोट के ईदगाह मैदान पर पाकिस्तानी सेना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन आयोजित किया गया. प्रदर्शन में पाकिस्तान परस्त इकलौते आयोजक सरदार उमर नज़ीर ने कहा कि जिस तरह पाकिस्तानी सेना ख़ैबर पख्तूनख्वाह और बलूचिस्तान में लोगो को मार रही है उसी तर्ज पर पीओके में मार रही है.
साथ ही उमर नज़ीर ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा की 4000 स्क्वायर किलोमीटर वाले पीओके में एक ढंग का अस्पताल नहीं है, जहां इलाज करवाया जा सके जबकि जम्मू कश्मीर में भारत ने 6 बड़े बड़े अस्पताल बनवा रखे हैं जिनमें पाकिस्तान में स्थित टॉप अस्पताल पाकिस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस (PIMS), अल शिफ़ा जैसे अस्पतालों से भी ज़्यादा सुविधाएं हैं.





