क्या आपको भी होम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड या छुट्टियों के पैकेज से जुड़े टेलीमार्केटिंग कॉल परेशान करते हैं? अगर हां, तो फ्रांस ने इस समस्या से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है. 11 अगस्त से वहां एक नया कानून लागू हो गया है, जिसके तहत ग्राहकों की पूर्व सहमति के बिना किए जाने वाले टेलीमार्केटिंग कॉल पर रोक लगा दी गई है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार का कहना है कि यह कानून वर्षों से मिल रही उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद लागू किया गया है. उपभोक्ता अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन Que Choisir Ensemble ने इसे “ऐतिहासिक कदम” बताया है. संगठन के मुताबिक, इससे फ्रांस के लोगों को रोजाना आने वाले अनचाहे मार्केटिंग कॉल से राहत मिलेगी.
फ्रांस में नया कानून क्या कहता है?
फ्रांस में लंबे समय से टेलीमार्केटिंग कॉल एक बड़ी समस्या रही है. सर्वे के अनुसार, करीब 97 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे रोजाना आने वाले मार्केटिंग कॉल से परेशान हैं. अब तक लोग सरकारी सेवा Bloctel पर अपना नंबर दर्ज कराकर ऐसे कॉल रोकने की कोशिश करते थे. 2021 से 2024 के बीच इस सेवा पर पंजीकृत नंबरों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई थी और प्रतिदिन 3.8 करोड़ से अधिक कॉल ब्लॉक की जा रही थीं.

अब नए कानून के तहत:
-ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना टेलीमार्केटिंग कॉल करना गैरकानूनी होगा.
-नियम तोड़ने वाले व्यक्ति पर 75,000 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
-कंपनियों पर 3,75,000 यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
-यदि कमजोर या संवेदनशील लोगों को निशाना बनाया जाता है तो पांच साल तक की जेल और 5 लाख यूरो तक के जुर्माने का प्रावधान है.
हालांकि, यदि ग्राहक पहले से अपनी सहमति दे चुका है या कंपनी और ग्राहक के बीच पहले से कोई व्यावसायिक संबंध (Existing Contract) है, तो सीमित परिस्थितियों में मार्केटिंग कॉल की अनुमति रहेगी.
कई अन्य देशों में पहले से हैं बैन
जर्मनी में 2009 से ही ऐसा ही बैन लागू है.नीदरलैंड्स ने भी टेलीमार्केटिंग कॉल्स के लिए नियम कड़े कर दिए हैं.देश में बिना मांगे आने वाली सेल्स कॉल्स पर पहले से ही बैन था, लेकिन अब कंपनियों को बिना पहले से इजाज़त लिए अपने ही ग्राहकों को प्रमोशनल ऑफ़र के साथ कॉल करने की अनुमति नहीं है.
कई दूसरे देशों ने ‘ऑप्ट-आउट’ सिस्टम पर आधारित उपाय अपनाए हैं.अमेरिका में, लोग ‘नेशनल डू नॉट कॉल रजिस्ट्री’ में साइन अप कर सकते हैं, जिससे बिना मांगी सेल्स कॉल्स कम हो जाती हैं. नाडा की अपनी “डू नॉट कॉल लिस्ट” है, जबकि यूनाइटेड किंगडम में ‘टेलीफ़ोन प्रेफरेंस सर्विस’ है. जो कंपनियां उन लोगों को कॉल करती हैं जिन्होंने ऑप्ट-आउट किया है, उन पर प्रति कॉल £500,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
भारत में भी स्पैम कॉल बड़ी चुनौती
भारत में भी अनचाहे कमर्शियल कॉल और संदेश बड़ी समस्या बने हुए हैं. भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में टेलीकॉम कंपनियों ने 24.4 अरब कॉल और संदेशों को संदिग्ध स्पैम के रूप में चिह्नित किया. इनमें 22.9 अरब इनकमिंग कॉल, 1.4 अरब SMS मिल थे.यानी औसतन हर दिन करीब 26.6 करोड़ संदिग्ध स्पैम कॉल और संदेशों की पहचान की गई. स अवधि में कुल इनकमिंग कॉल का लगभग 3.2 प्रतिशत संदिग्ध स्पैम पाया गया.

शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं
AI आधारित स्पैम पहचान प्रणाली लागू होने के बावजूद शिकायतों में कमी नहीं आई है. प्रैल से जून के बीच TRAI को 10.8 लाख शिकायतें मिलीं. इनमें से 5.5 लाख शिकायतें ऐसी थीं जिन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती थी. न शिकायतों में लगभग 89 प्रतिशत यानी 9.6 लाख शिकायतें TRAI के Do Not Disturb (DND) ऐप के जरिए दर्ज की गईं. न 2026 तक DND ऐप के डाउनलोड बढ़कर 33.1 लाख हो गए, जबकि 2025 के अंत तक यह संख्या करीब 28 लाख थी.
नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई
TRAI ने इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी सख्ती बढ़ाई.

पहली बार नियम तोड़ने पर 1.3 लाख टेलीकॉम संसाधनों को 15 दिनों के लिए निलंबित किया गया.
बार-बार उल्लंघन करने पर 46,786 टेलीकॉम संसाधनों को एक वर्ष के लिए डिस्कनेक्ट कर दिया गया.
263 सेंडर्स को ब्लैकलिस्ट किया गया.
2,873 SMS हेडर ब्लॉक किए गए.
टेलीकॉम संसाधनों में मोबाइल नंबर, SMS हेडर और अन्य संचार माध्यम शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल कमर्शियल कॉल या संदेश भेजने के लिए किया जाता है.
क्या केवल AI से समस्या हल हो जाएगी?
TRAI और टेलीकॉम कंपनियां अब AI आधारित सिस्टम की मदद से संदिग्ध स्पैम कॉल और संदेशों की पहचान कर रही हैं. इससे बड़ी संख्या में स्पैम ट्रैफिक को चिन्हित करना और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना आसान हुआ है. लांकि, लगातार बढ़ती शिकायतें यह भी बताती हैं कि केवल तकनीक के भरोसे इस समस्या का समाधान संभव नहीं है. जब तक नियमों का सख्ती से पालन, प्रभावी प्रवर्तन और उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक अनचाहे टेलीमार्केटिंग कॉल पूरी तरह बंद होना मुश्किल रहेगा.
फ्रांस ने उपभोक्ता की पूर्व सहमति (Opt-in Model) को कानूनी आधार बनाया है. भारत में भी DND, AI आधारित निगरानी और सख्त प्रवर्तन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन स्पैम कॉल पर प्रभावी नियंत्रण के लिए इन व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की जरूरत बनी हुई है.





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