भारत के FCRA बिल से तिलमिला उठा ट्रंप का सांसद, बोला- ‘ये हमारे धर्म पर…’


भारत में फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) प्रस्तावित संशोधन को लेकर अमेरिका ने राजनीति शुरू कर दी है. यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने इस बिल की आलोचना की है और आपत्ति जताई है. राइली मूर ने इस बिल को ईसाई समुदाय पर सीधा हमला करार दिया है. इसके साथ ही भारत को अमेरिका के साथ संबंध खराब होने की चेतावनी भी दी है.

राइली मूर ने इस मामले को लेकर एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है. उन्होंने लिखा, ‘भारत में ईसाई समुदाय तब से रह रहा है, जब सेंट थॉमस द एपोस्टल यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशकों बाद मालाबार तट आए थे, लेकिन इस लंबे इतिहास के बावजूद भारत की संसद FCRA बिल के नियमों में ऐसे संशोधन करने पर विचार कर रही है, जिससे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटीज का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की छूट मिल सके.’

उन्होंने कहा, ‘यह ईसाइयों पर सीधा हमला है. अगर यह बिल पास हुआ तो भारत और अमेरिका के संबंध चिंता जनक स्थिति में पहुंच सकते हैं.’

क्या है FCRA बिल

भारत में संसद का मानसून सत्र चल रहा है. मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट, 2010 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. यह कानून तय करता है कि गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ), धार्मिक संस्थान, शैक्षणिक संस्थान और चैरिटेबल ट्रस्ट विदेशी चंदा कैसे जुटाते हैं और इसका कैसे इस्तेमाल करते हैं. मौजूदा नियमों के मुताबिक इसके लिए गृह मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है.

FCRA बिल पर क्यों हो रहा विवाद 

विपक्षी पार्टियां और एनजीओ का मानना है कि नए संशोधन के बाद विदेशी फंडिंग पर निर्भर संगठनों पर केंद्र सरकार का ज्यादा नियंत्रण हो जाएगा. चर्च और धार्मिक संगठन इस वजह से भी चिंतित हैं कि अगर उनका रजिस्ट्रेशन पांच साल बाद एक्सपायर होता है और रीन्यू नहीं होता है तो उनके द्वारा बनाए गए स्कूल या हॉस्पिटल सरकार के नियंत्रण में आ सकते हैं.

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