Kota Kidnapping Case: इंदौर के एक होस्टल में फोटो खींचे, दूसरे में रात बिताई, अब दर-दर भटक रहे छात्र-छात्रा
Kota Kidnapping Case: पढ़ें शिवपुरी की छात्रा काव्या धाकड़ के फर्जी अपहरण की सिलसिलेवार कहानी।
By Sameer Deshpande
Publish Date: Thu, 21 Mar 2024 10:53 AM (IST)
Up to date Date: Thu, 21 Mar 2024 11:00 AM (IST)

HighLights
- शिवपुरी की छात्रा काव्या धाकड़ के अपहरण से पर्दा उठ गया है।
- उसने ब्वायफ्रेंड हर्षित के साथ मिलकर साजिश रची थी।
- घटनाक्रम का केंद्रबिंदु इंदौर का भंवरकुआं थाना क्षेत्र रहा।
Kota Kidnapping Case: नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बैराड़, शिवपुरी की छात्रा काव्या धाकड़ के अपहरण से पर्दा उठ गया है। उसने ब्वायफ्रेंड हर्षित के साथ मिलकर साजिश रची थी। घटनाक्रम का केंद्रबिंदु इंदौर का भंवरकुआं थाना क्षेत्र रहा। इसी इलाके के एक होस्टल में कथित रुप से बंधक बनी। फोटो खींचे और फिरौती मांगी।दूसरे होस्टल में रुकी और हर्षित के साथ चली गई। दोनों के पास सिर्फ ढाई हजार रुपये बचे हैं। रुपयों और रुकने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
नईदुनिया ने पूरे मामले की पड़ताल की है। उस जगह भी पहुंचा, जहां काव्या ने हाथ-पैर बंधवाकर फोटो खिंचवाए और अपने पिता रघुवीर धाकड़ से रिहाई के एवज में 30 लाख रुपये की मांग की।
यह है सिलसिलेवार फर्जी अपहरण की कहानी
– 18 मार्च को स्कूल संचालक रघुवीर के वाट्सएप एप फोटो भेज कर 30 लाख रुपये की फिरौती मांगी। यह भी कहा कि रुपये नहीं मिले तो काव्या को जान से खत्म कर देंगे। शिवपुरी पुलिस की सूचना पर कोटा पुलिस सक्रिय हुई। जांच में पाया गया जिस नंबर से फिरौती मांगी वो जयपुर से खरीदी थी। सिम काव्या द्वारा ही खरीदी है।
– काव्या NEET की पढ़ाई कर रही है। उसकी मां पिछले साल 3 अगस्त में कोटा के आर्यभट्ट टावर से संचालित फीजिक्स वाला कोचिंग क्लासेस में प्रवेश करवाकर आई थी। कोटा की डीसीपी अमृता दुहान ने तस्दीक करवाई तो पता चला काव्या की मां उसी दिन चली गई। काव्या कोटा में 3 दिन रुकी और वापस इंदौर आ गई। इसके बाद कभी इंदौर से कोटा नहीं गई।
-19 मार्च को कोटा के विज्ञान नगर की पुलिस इंदौर पहुंची। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून) अमितसिंह से मदद मांगी। अपराध शाखा के एडी. डीसीपी राजेश दंडोतिया ने टीम को मदद के लिए सौंपा। पुलिस भंवरकुआं थाना क्षेत्र के भोलाराम उस्ताद मार्ग पहुंची। सिमरन पीजी की चौथी मंजिल की तलाशी ली गई। इसी इमारत की चौथी मंजिल पर रुम नंबर 403 में काव्या के हाथ पैर बांधे गए थे।
– 20 मार्च को पुलिस ने पूरी घटना में सहयोग कर रहे ब्रजेंद्र प्रताप को हिरासत में ले लिया। सिमरन पीजी में ब्रजेंद्र ही रहता था। उसने काव्या और हर्षित को भाई-बहन बताकर रुकवाया था।
– 20 मार्च को पुलिस को भोलाराम मार्ग के दीक्षा होस्टल के नए फुटेज मिल गए। इसमें काव्या और हर्षित जाते हुए स्पष्ट नजर आ रहे थे। फुटेज मंगलवार यानी 19 मार्च का है। काव्या की पीठ पर बैग भी टंगा हुआ है। उनसे एक युवक बात कर रहा है। दोनों घबराए हुए नजर आ रहे हैं।
– 20 मार्च को पुलिस ने अमन सोलंकी नामक युवक को हिरासत में लिया। उसने बताया काव्या और हर्षित के पास रुपये नहीं है। काव्या तो दीक्षा होस्टल में रुक गई लेकिन हर्षित को उसने सोने की जगह दी।
– 20 मार्च को पुलिस को हर्षित का फोन भी मिल गया। हालांकि इस फोन का फिरौती के लिए उपयोग नहीं हुआ था।
इसी जगह हाथ-पैर बांध कर लेटी थी काव्या
यह है सिमरन पीजी की वो जगह जहां काव्या का हाथ पैर बंधा हुआ फोटो खींचा गया। पुलिस ने यहां से रस्सी और कपड़ा बरामद कर लिया है। मैनेजर मनोज से पूछताछ की तो उसने भी पुष्टी कर दी।
आखिरी सीसीटीवी फुटेज
19 मार्च को दीक्षा होस्टल से हर्षित के साथ जाते हुए देखी गई काव्या।


