MP IT Court docket: चूक नहीं मान रहा था बैंक, आइटी कोर्ट ने डिजिटल सिग्नेचर पर रोक लगा वापस दिलवाए रुपये

MP IT Court docket: बैंक ने दो दिन के भीतर चुकाए 80 हजार रुपये, आइटी कोर्ट द्वारा बैंक को सबक सिखाने का अनूठा मामला।

By Praveen Malaviya

Publish Date: Thu, 21 Mar 2024 03:41 AM (IST)

Up to date Date: Thu, 21 Mar 2024 03:41 AM (IST)

MP IT Court: चूक नहीं मान रहा था बैंक, आइटी कोर्ट ने डिजिटल सिग्नेचर पर रोक लगा वापस दिलवाए रुपये
मध्य प्रदेश आईटी कोर्ट।

MP IT Court docket: प्रवीण मालवीय, भोपाल। साइबर और बैंकों से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों की सुनवाई करने वाली मध्य प्रदेश की आइटी कोर्ट (कोर्ट आफ एडीजुडिकेटिंग आफिसर) ने बैंकों को सबक सिखाने वाला ऐसा फैसला सुनाया है जो उदाहरण बन सकता है। एक उपभोक्ता के खाते से उसकी गलती के बिना रुपये निकल जाने के मामले में कोर्ट ने स्टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआइ) की ब्योहारी (शहडोल) शाखा की ओर से सुरक्षा में कमी मानते हुए उपभोक्ता को 80 हजार रुपये लौटाने के निर्देश दिए थे। आदेश के एक साल बाद तक रुपये नहीं चुकाने पर आइटी कोर्ट ने उस बैंक शाखा के डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट को निलंबित करने का आदेश दे दिया। उक्त बैंक शाखा का कामकाज ठप होने की नौबत आते ही बैंक ने दो दिन के भीतर रुपये चुका दिए।

डेबिट कार्ड घर पर था, एटीएम से निकल गए थे रुपये

शहडोल निवासी बालेंद्र प्रसाद सोनी जुलाई, 2019 में एटीएम पर गए लेकिन रुपये नहीं निकले। उन्होंने कार्ड घर में ही रखा था। कुछ दिन बाद उनके खाते से तीन बार में 80 हजार रुपये निकल गए। ट्रांजेक्शन एटीएम से किया गया था। बालेंद्र सोनी ने बैंक शाखा के अलावा साइबर सेल भोपाल में भी शिकायत दर्ज कराई।

बैंक ने तर्क दिया कि रुपये बालेंद्र सोनी के डेबिट कार्ड से एटीएम के माध्यम से निकले हैं, गलती उपभोक्ता की है। कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि वह एटीएम का सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत कर सिद्ध करे कि रुपये किसने निकाले हैं। बैंक बालेंद्र सोनी के कार्ड से रुपये निकाला जाना सिद्ध नहीं कर पाई।

अधिकारी एटीएम की सीसीटीवी रिकार्डिंग भी पेश नहीं कर पाए। आइटी कोर्ट ने पाया कि एटीएम कार्ड का क्लोन बनाकर किसी ठग ने रुपये निकाले हैं। 24 मार्च, 2023 को कोर्ट ने निर्णय दिया कि बैंक पीड़ित को 80 हजार रुपये ब्याज सहित चुकाए।

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बार-बार आदेश को ठेंगा दिखाता रहा बैंक

बैंक को आदेश के 30 दिनों में उसका पालन करना था लेकिन बैंक ने रुपये नहीं चुकाए। जून, 2023 में बालेंद्र सोनी ने फिर कोर्ट में याचिका लगाई। अक्टूबर, 2023 में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बैंक को फटकार लगाई और कोर्ट का समय बरबाद करने के लिए कुल छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया फिर भी बैंक ने आदेश का पालन नहीं किया। आखिरकार पांच मार्च, 2024 को कोर्ट ने पीड़ित को राशि नहीं चुकाने तक डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट को निलंबित करने के आदेश दे दिए। ऐसा होते ही बैंक प्रबंधन ने दो दिन में राशि लौटा दी।

प्रभावित होते बैंक के रोजमर्रा के कार्य

पीड़ित के वकील और साइबर ला के जानकार यशदीप चतुर्वेदी बताते हैं कि बैंक रोजमर्रा के कई कामों के लिए डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग करते हैं। संबंधित शाखा के डिजिटल सिग्नेचर ब्लाक होने से कई कामों सहित बड़े लेनदेन रुक जाते इसलिए बैंक ने तुरंत कोर्ट का आदेश मान लिया।

इसलिए बनाई गई है आइटी कोर्ट

यशदीप चतुर्वेदी के अनुसार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम- 2000 के तहत प्रदेश में आइटी कोर्ट (कोर्ट आफ एडीजुडिकेटिंग आफिसर) शुरू की गई है। दरअसल, खाताधारकों की राशि और बैंक संबंधी जानकारियां इलेक्ट्रानिक रूप में बैंक के सर्वर और कंप्यूटर संसाधनों पर स्टोर होती है। इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 के अनुसार बैंक की होती है। बैंक संबंधी इलेक्ट्रानिक धोखाधड़ी या गड़बड़ी के मामले इस कोर्ट में सुने जाते हैं।

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    नईदुनिया डॉट कॉम इंदौर में मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ डेस्क पर वरिष्ठ उप-संपादक। पत्रकारिता और जनसंचार में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर से बैचलर और विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन से मास्टर्स डिग्री। इंदौर में 2014