‘केस खत्म करने के बदले नहीं हुई कोई डील’, गौतम अडानी ने कोर्ट में सभी आरोपों को किया खारिज

‘केस खत्म करने के बदले नहीं हुई कोई डील’, गौतम अडानी ने कोर्ट में सभी आरोपों को किया खारिज


Gautam Adani News: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने अमेरिकी कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर उन सभी अफवाहों और कयासों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके खिलाफ अमेरिकी मामले को बंद करने के पीछे कोई गुप्त समझौता या डील हुई है.

अडानी ने साफ कहा है कि अमेरिकी न्याय विभाग यानी DoJ की ओर से उनके खिलाफ आपराधिक आरोपों को हटाने के फैसले के पीछे कोई वादा, लेन-देन या गुप्त डील नहीं थी. उन्हें ऐसी किसी भी बात की कोई जानकारी नहीं है.

फायदे के बदले केस हटाने की बात पूरी तरह गलत- अडानी

यह हलफनामा अमेरिकी कोर्ट के जज निकोलस गराउफिस के 8 जुलाई के आदेश के जवाब में दाखिल किया गया है. जज ने अडानी से लिखित में पूछा था कि क्या वे आरोपों को हटाने के बदले में किसी भी तरह के वादे, ऑफर या समझौते के बारे में जानते हैं. इसके जवाब में अडानी ने कहा, ”मुझे ऐसी किसी भी बात की जानकारी नहीं है, जिसे इस केस को बंद करने के बदले में किसी को देने, लेने, वादा करने या स्वीकार करने की बात कही गई हो. किसी भी तरह के कीमती सामान या फायदे के बदले केस हटाने की बात पूरी तरह गलत है.”

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कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि अडानी ग्रुप ने अमेरिका में जो 10 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की थी, उसी के बदले उनके खिलाफ केस हटाया गया है. इसका जवाब देते हुए अडानी ने बताया, ”अडानी ग्रुप ने अमेरिका में निवेश करने का फैसला 13 नवंबर 2024 को ही सार्वजनिक कर दिया था, जबकि उनके खिलाफ अमेरिकी कोर्ट का मामला इसके बाद सामने आया था.”

अडानी के वकीलों (सुलिवन एंड क्रॉमवेल LLP) ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं और एक प्रस्ताव भी दिया था कि अगर अमेरिकी प्रशासन चाहे तो इस निवेश को मामले के समाधान का हिस्सा मान सकता है. हालांकि, अमेरिकी न्याय विभाग ने वकीलों को साफ कर दिया था कि केस हटाने के फैसले में इस निवेश का कोई रोल नहीं होगा. इसलिए, अडानी ने साफ किया कि इस निवेश योजना का केस बंद होने से कोई लेना-देना नहीं है.

अमेरिकी न्याय विभाग ने भी अफवाहों को नकारा

इससे पहले 4 जुलाई को अमेरिकी सरकारी वकीलों ने भी कोर्ट में साफ किया था कि निवेश के बदले केस हटाने की खबरें पूरी तरह झूठी हैं. यह फैसला लेने वाले मुख्य अधिकारी आर. ट्रेंट मैककॉप्टर ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने यह केस इसलिए हटाने की मांग की, क्योंकि यह मामला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं था.

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केस हटाने के कारण क्या थे?

  • कथित गड़बड़ी मुख्य रूप से भारत में हुई थी.
  • इस मामले में किसी भी अमेरिकी निवेशक को कोई नुकसान नहीं हुआ है.
  • भारत में पहले से ही इस मामले की जांच चल रही है.
  • यह मामला जो बाइडन प्रशासन के आखिरी दिनों में केवल “नाम खराब करने” के मकसद से लाया गया था.

अब अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले को हमेशा के लिए बंद करने की मांग की है, जिससे यह केस पूरी तरह खत्म हो जाएगा. जज इस पर अंतिम फैसला सुनाने से पहले अडानी का पक्ष जानना चाहते थे, जो अब हलफनामे के जरिए साफ हो चुका है.