पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने शनिवार (27 जून) की रात कराची में सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर आतंकी हमले को नाकाम करते हुए छह विद्रोहियों को मार गिराया और एक को जिंदा पकड़ लिया. इस हमले में पाकिस्तान के चार जवानों की भी मौत हो गई है.
सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के अनुसार, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े संगठन जमात-उल-अहरार के विद्रोहियों ने शनिवार रात करीब 8:30 बजे कराची के घनी आबादी वाले गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित सिंध रेंजर्स के भिट्टाई विंग मुख्यालय पर हमला कर दिया. करीब 90 मिनट तक हुई भीषण मुठभेड़ में विशेष सुरक्षा इकाई (एसएसयू) के कमांडो और आतंकवाद रोधी बल (एटीएफ) ने भी रेंजर्स के साथ मिलकर विद्रोहियों से मुकाबला किया. इस हमले में 4 रेंजर्स भी मारे गए.
भीषण गोलीबारी के बीच सुरक्षा बलों ने पूरे परिसर और आस-पास की सड़कों को बंद कर दिया. स्थानीय लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई, जबकि आसपास के कुछ इलाकों में बिजली भी बंद कर दी गई. इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली है. यह संगठन टीटीपी से ही जुड़ा हुआ है, जो मुख्य रूप से पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय है और नागरिकों, सुरक्षा बलों तथा सरकारी अधिकारियों पर हमले करता रहा है.
2024 में कराची में हुआ था बड़ा हमला
अक्टूबर 2024 के बाद से कराची में यह पहला बड़ा आतंकी हमला है. कराची हवाई अड्डे के निकट हुए आत्मघाती विस्फोट में 2 चीनी इंजीनियरों की मौत हो गई थी. इस घटना की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली थी. प्रारंभिक जांच के अनुसार आतंकवादियों ने एक वाहन से रेंजर्स मुख्यालय के मुख्य द्वार को तोड़कर परिसर में प्रवेश किया और अंदर घुसते ही हथगोले फेंके, जिससे कई विस्फोट हुए.
सिंध के सीएम ने दिए जांच के आदेश
सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने पुलिस प्रमुख और कराची के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक को घटना की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं. रेस्क्यू 1122 सिंध ने बताया कि उसे गुलिस्तान-ए-जौहर के ब्लॉक-5 के पास विस्फोट की सूचना मिली थी, जिसके बाद केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से तुरंत राहत एवं बचाव दल रवाना किए गए.
बता दें कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पिछले साल के अंत से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है. पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियां अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर टीटीपी को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने और सीमा पार से हमले कराने का लगातार आरोप लगाती रही है. इसके जवाब में पाकिस्तान की सेना ने भी अफगानिस्तान के भीतर टीटीपी के कथित ठिकानों और प्रशिक्षण शिविरों पर कई बार कार्रवाई की.
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