- 3 जून को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ.
- कच्चे तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता ला रही हैं.
- ईंधन की कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है.
- लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से महंगाई पर असर पड़ेगा.
Petrol-Diesel Price Today on June 3: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 25 मई को हुई बढ़ोतरी के बाद 3 जून को पूरे भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर रहीं. पिछले कुछ महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर बने हुए हैं और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं. 25 मई की बढ़ोतरी इससे पहले बीते दो हफ्तों में कीमतों में हुई चौथी बढ़ोतरी थी.
शहरवार पेट्रोल-डीजल की कीमत
| शहर | पेट्रोल की कीमत (प्रति लीटर) | डीजल की कीमत (प्रति लीटर) |
| दिल्ली | 102.12 रुपये | 95.20 रुपये |
| मुंबई | 111.18 रुपये | 97.83 रुपये |
| कोलकाता | 113.47 रुपये | 99.82 रुपये |
| चेन्नई | 107.77 रुपये | 99.55 रुपये |
| बेंगलुरु | 110.93 रुपये | 98.80 रुपये |
| हैदराबाद | 115.69 रुपये | 103.82 रुपये |
| अहमदाबाद | 101.70 रुपये | 97.84 रुपये |
| लखनऊ | 102.05 रुपये | 95.55 रुपये |
| पटना | 113.35 रुपये | 99.36 रुपये |
महंगाई बढ़ने का खतरा
CRISIL की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था पर महंगाई का काफी दबाव डाल सकती हैं. आने वाले महीनों में ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों और कोर महंगाई, दोनों के बढ़ने की उम्मीद है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि 15 मई से अब तक खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. अगर दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो कीमतों में और भी बढ़ोतरी हो सकती है. तेल मार्केटिंग कंपनियां धीरे-धीरे अपने नुकसान (under-recoveries) को कम कर रही हैं, ऐसे में आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में कुल बढ़ोतरी 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है.
CRISIL ने क्या लगाया अनुमान?
CRISIL के लगाए गए अनुमानों के अनुसार, ईंधन की कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महंगाई में सीधे तौर पर लगभग 36 बेसिस पॉइंट्स (bps) की वृद्धि कर सकती है, जबकि 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से यह असर बढ़कर लगभग 48 bps तक पहुंच सकता है.
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ट्रांसपोर्टेशन पर आने वाला खर्च एक ऐसा बड़ा और अहम जरिया है, जिससे ईंधन की महंगाई पूरे अर्थव्यवस्था में फैलती है. भारत की लॉजिस्टिक्स लागत में माल ढुलाई का हिस्सा 54 परसेंट है, जबकि देश की लगभग 71 परसेंट माल ढुलाई सड़क परिवहन के जरिए होती है. सड़क परिवहन की लागत में ईंधन का हिस्सा लगभग 42 परसेंट है, जिससे यह क्षेत्र ईंधन की बढ़ती कीमतों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाता है.
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