अमेरिका-ईरान के बीच पीस टॉक को लेकर पाकिस्तान का नाम बार-बार सामने आता है. खबरों के मुताबिक, पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर लगातार ईरान के संपर्क में हैं. कई मौकों पर डोनाल्ड ट्रंप भी इनकी तारीफ कर चुके हैं लेकिन इस बीच एक देश ऐसा भी है जो चुपचाप क्षेत्रीय हालात को स्थिर कराने के लिए लगातार कोशिशें कर रहा है और वो है मिडिल ईस्ट का ही एक देश मिस्त्र. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ क्षेत्रीय हालात पर बातचीत की.
क्या बोले मिस्र के राष्ट्रपति
उन्होंने कहा कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता कराने में मदद कर रहा है. शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, फोन से हुई बातचीत में अल सीसी ने कहा कि मिस्र विभिन्न संबंधित पक्षों के साथ लगातार और गहन संपर्क में है, ताकि अमेरिका और ईरान के बीच एक व्यापक समझौता कराने में मदद मिल सके. उन्होंने कहा कि इस मामले में मिस्र का रुख अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और देशों की संप्रभुता तथा उनके संसाधनों के सम्मान पर आधारित है.
होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना चाहिए- मैक्रों
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया कि फ्रांस क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने और मध्य पूर्व को अराजकता की ओर जाने से रोकने के लिए प्रयास कर रहा है. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना चाहिए और वहां से जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगनी चाहिए. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका और ईरान परमाणु समझौता होने के काफी करीब पहुंच गए हैं. हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प बनी रहेगी.
ट्रंप ने अब क्या कहा?
फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके. ट्रंप ने कहा कि हम एक बहुत अच्छे समझौते के करीब हैं. अगर यह समझौता हो जाता है तो अच्छा है, नहीं तो फिर हमें सैन्य विकल्प पर आगे बढ़ना पड़ेगा. उन्होंने दावा किया कि ईरान ऐसी शर्तों पर सहमत हो गया है जिनके तहत वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही हासिल करेगा.
ट्रंप ने कहा कि मैंने पूछा कि अगर आप किसी और से परमाणु हथियार खरीद लें तो क्या होगा? अब इसमें यह भी शामिल है कि हम न तो परमाणु हथियार बनाएंगे और न ही किसी भी तरह से खरीदेंगे. राष्ट्रपति ने बातचीत को कठिन बताया, लेकिन कहा कि धीरे-धीरे प्रगति हो रही है. उन्होंने कहा कि वे बहुत सख्त बातचीत करने वाले हैं इसमें समय लगता है लेकिन धीरे-धीरे हमें लगता है कि हम अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं.
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