फॉर्म 16 आने से पहले क्या भर सकते हैं ITR? जल्दबाजी में टैक्स फाइल करने वाले जान लें जरूरी बात

फॉर्म 16 आने से पहले क्या भर सकते हैं ITR? जल्दबाजी में टैक्स फाइल करने वाले जान लें जरूरी बात


ITR Rules 2026: आयकर रिटर्न दाखिल करने में बहुत दिक्कतें होती हैं. हर साल की तरह इस बार भी आयकर विभाग ने ऑनलाइन फाइलिंग शुरू कर दी है. विभाग ने आईटीआर-1 और आईटीआर-4 के लिए एक्सेल यूटिलिटीज़ जारी कर दी हैं, जिससे कई टैक्सपेयर फॉर्म 16 प्राप्त होने से पहले ही प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं, जो आमतौर पर जून के बीच तक आता है. 

दिलचस्प बात यह है कि इस साल टैक्स दाखिल करने के नियमों में कुछ जरूरी बदलाव हैं. हालांकि फाइलिंग का तरिका पहली नज़र में थोड़ा फैमिलियर लग सकता है, लेकिन फॉर्म और रिपोर्टिंग नियमों में कई बदलावों का मतलब है कि टैक्सपेयर को पहले से ज्यादा जागरूक रहने की जरूरत हो सकती है. वही नए प्रकटीकरण आवश्यकताओं से लेकर वित्तय फायदा रिपोर्टिंग में बदलाव तक, आकलन साल (AY) 2026-27 के लिए अपना रिटर्न दाखिल करना पिछले साल जैसा बिल्कुल नहीं हो सकता है. 

इसके अलावा, भले ही नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू हो चुका है, फिर भी पुराने आयकर एक्ट 1961 के तहत यह रिटर्न दाखिल करने का आखिरी राउंड होगा. चूंकि वित्तीय साल 2025-26 के लिए टैक्स का हिसाब पुराने कानून के तहत ही किया जाएगा, इसलिए टैक्सपेयर को रिटर्न दाखिल करते समय जरूर ध्यान देना चाहिए.

दो आवासीय संपत्तियों से होने वाली आय की रिपोर्टिंग

इस साल की एक बड़ी राहत उन टैक्सपेयर के लिए है जिनके पास एक से अधिक मकान हैं. पहले, आयकर-1 (सहज) दाखिल करने वाले कर्मचारी व्यक्तियों और आयकर-4 (सुगम) दाखिल करने वाले लघु व्यवसाय करदाताओं के पास आय रिपोर्टिंग के लिए सीमित ऑपशन थे. लेकिन अब, टैक्सपेयर इन प्रपत्रों का इस्तमाल करते हुए ज्यादातर दो आवासीय संपत्तियों से होने वाली आय का खुलासा कर सकते हैं. सरल शब्दों में, यह है कि वेतनभोगी और दो मकानों के मालिक व्यक्ति जटिल आयकर प्रपत्रों के बजाय आसान आयकर प्रपत्रों का उपयोग जारी रख सकते हैं.

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वसूल न हो सकने वाले किराए को लेकर नया खुलासा

इसी के साथ एक और बदलाव जिस पर मकान मालिकों का ध्यान जा सकता है, वह है वसूल न हो सकने वाले किराए से जुड़ा एक नई खुलासा आवश्यकता. दरअसल, आयकर विभाग ने आईटीआर फॉर्म, जिनमें आईटीआर-1 और आईटीआर-4 शामिल हैं, में “वसूल न हो सकने वाले किराए की राशि” नामक एक अलग खंड जोड़ा है.  बात करें पहले कि तो, पहले इन फॉर्मों को भरने वाले करदाताओं के पास वसूल न हो सकने वाले किराए की जानकारी देने के लिए कोई अलग स्थान नहीं था.  इस बदलाव का मकसद किराये से होने वाली कमाई के खुलासे को ज्यादा व्यापक और साफ सुथरा बनाना है.

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बैंक बैलेंस की जानकारी देना अब जरूरी 

Presumptive Taxation Scheme के तहत आयकर रिटर्न (ITR-4) दाखिल करने वाले टैक्सपेयर के लिए एक ज्यादा जानकारी देना जरूरी हो गया है. धारा 44एडी, 44एडीए और 44एई के तहत आने वाले लोगो को अब 31 मार्च, 2026 तक अपने सभी एक्टिव बैंक खातों का कुल समापन बैलेंस बताना होगा. यह जानकारी आयकर रिटर्न(ITR-4) के ई21 क्षेत्र में देनी जरूरी है. टैक्स एक्सपर्टों  का कहना है कि गलत रिपोर्टिंग या बकाया राशि का खुलासा न करने पर कर नोटिस या जुर्माना लग सकता है.