- मेटा ला रहा है AI एजेंट्स, 2 अरब यूजर्स के काम करेंगे.
- ये एजेंट्स यूजर के कमांड पर AI की मदद से टास्क करेंगे.
- AI एजेंट्स ऐप्स और वेबसाइट्स का काम खुद से करेंगे.
- नया इकोसिस्टम बनेगा, जिससे एजेंट्स की परफॉरमेंस बेहतर होगी.
Meta AI Agents: फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के मालिकाना हक वाली कंपनी मेटा इन दिनों एआई एजेंट्स पर काम करने में जुटी हुई है. इन्हें यूजर के डेली टास्क हैंडल करने के लिए तैयार किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि इन एआई एजेंट्स को पर्सनलाइज किया जा सकेगा और दुनियाभर में मेटा के 2 अरब से ज्यादा यूजर्स के डेली टास्क पूरे कर पाएंगे. यानी आने वाले समय में आपको अपने काम करने के लिए डिजिटल असिस्टेंट मिल जाएंगे. आइए जानते हैं कि ये काम कैसे करेंगे और इससे आपका जीवन कैसे आसान होने वाला है.
क्या होते हैं AI Agents?
आगे बढ़ने से पहले यह समझ लेना जरूरी है कि एआई एजेंट्स क्या होते हैं. एआई एजेंट्स असल में ऐसे सॉफ्टवेयर सिस्टम होते हैं, जो यूजर की कमांड पर एआई की मदद से टास्क को कंप्लीट करते हैं. इनमें रीजनिंग, प्लानिंग और मेमोरी की कैपेबिलिटीज होती हैं. ये खुद से सीखकर और अपने डिसीजन खुद ले सकते हैं. आपको इन्हें बस टास्क देना होता है, अपनी कैपेबिलिटीज के हिसाब से ये उसे पूरा करने का तरीका खुद से डिसाइड कर लेते हैं. ये एआई चैटबॉट से पूरी तरह अलग होते हैं. चैटबॉट केवल आपके सवालों का जवाब देते हैं, वहीं एजेंट्स कमांड के आधार पर एक्शन भी ले सकते हैं.
कैसे काम करेंगे मेटा के AI Agents?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा इन एआई एजेंट्स को अपने अपकमिंग Muse Spark AI मॉडल पर तैयार करेगी. ये एजेंट्स एक डिजिटल असिस्टेंट के तौर पर काम करेंगे. यानी यूजर को ग्रॉसरी ऑर्डर करने से लेकर टिकट बुकिंग के लिए खुद से ऐप्स और वेबसाइट ओपन करने की जरूरत नहीं रहेगी. वह इन एआई एजेंट्स को अपना काम सौंप सकता है और ये एजेंट्स बैकग्राउंड में उस टास्क को पूरा कर देंगे. बताया जा रहा है इन एजेंट्स के शुरुआती वर्जन को मेटा के कर्मचारी टेस्ट कर रहे हैं.
नया इकोसिस्टम क्रिएट करेगी मेटा
इन एआई एजेंट्स के साथ-साथ मेटा एक नया इकोसिस्टम भी क्रिएट कर रही है. इस इकोसिस्टम की मदद से इन एआई एजेंट्स की एक्टिविटीज जैसे शेड्यूलिंग, कम्युनिकेशन और दूसरे डेली वर्कफ्लो को मैनेज किया जा सकेगा. इसमें ऐसा फीचर भी जोड़ा जा सकता है, जिससे ये एजेंट यूजर की पर्सनल और फाइनेंस इंफोर्मेशन को भी एक्सेस कर पाएंगे. इससे एआई एजेंट्स की कॉन्टेक्चुअल अंडरस्टैंडिंग और परफॉर्मेंस बेहतर होगी. हालांकि, इससे यूजर सेफ्टी और डेटा प्राइवेसी को लेकर नई चिंताएं भी पैदा होंगी.
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