AI Companion का नया खेल! Teens इस तरह कर रहे इसका इस्तेमाल, जानकर आपके भी उड़ जाएंगे होश

AI Companion का नया खेल! Teens इस तरह कर रहे इसका इस्तेमाल, जानकर आपके भी उड़ जाएंगे होश


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  • विशेषज्ञ सुरक्षित AI बनाने की वकालत कर रहे हैं।

AI Companion for Teens: आज की युवा पीढ़ी AI का इस्तेमाल सिर्फ सवाल-जवाब या चैटिंग तक सीमित नहीं रख रही बल्कि इसे अपनी कल्पनाशक्ति और भावनाओं को व्यक्त करने का नया जरिया बना चुकी है. साल 2022 में Character.AI नाम के प्लेटफॉर्म ने लोगों को अपने खुद के AI कैरेक्टर बनाने का मौका दिया.

देखते ही देखते यह ऐप बेहद लोकप्रिय हो गया और करोड़ों यूज़र्स इससे जुड़ गए. लाखों अलग-अलग चैटबॉट कैरेक्टर बनाए गए जिनमें बड़ी संख्या किशोरों की थी. लेकिन 2025 में, बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच इस प्लेटफॉर्म ने 18 साल से कम उम्र के यूज़र्स पर रोक लगा दी.

क्या सच में AI सिर्फ “साथी” बन रहा है?

अक्सर यह माना जाता है कि युवा AI का इस्तेमाल सिर्फ दोस्ती या भावनात्मक सहारे के लिए करते हैं. लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है. रिसर्च के मुताबिक ज्यादातर किशोर AI का इस्तेमाल जानकारी पाने के लिए करते हैं. होमवर्क में मदद लेना भी एक बड़ा कारण है और काफी लोग इसे सिर्फ मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करते हैं. भावनात्मक सपोर्ट या अकेलेपन को दूर करने के लिए AI का उपयोग करने वालों की संख्या काफी कम पाई गई.

AI बना एंटरटेनमेंट और क्रिएटिविटी का टूल

किशोरों के लिए AI सिर्फ एक चैटबॉट नहीं बल्कि एंटरटेनमेंट का नया प्लेटफॉर्म बन गया. यहां वे अपने पसंदीदा कैरेक्टर के साथ कहानी बनाते हैं, रोलप्ले करते हैं और अपनी कल्पना को विस्तार देते हैं. AI के साथ तीन खास तरह के प्रयोग.

भावनात्मक राहत (Restoration)

कई युवा AI का इस्तेमाल अपनी भावनाएं साझा करने, तनाव कम करने या मन हल्का करने के लिए करते हैं. वे कम्फर्ट बॉट्स बनाते हैं जो उन्हें हौसला देते हैं या मुश्किल समय में साथ निभाते हैं.

खोज और रचनात्मकता (Exploration)

AI के जरिए युवा नई कहानियां लिखते हैं अपनी पसंदीदा फिल्मों या किताबों की दुनिया को आगे बढ़ाते हैं और नई कल्पनाएं गढ़ते हैं. इससे उनकी राइटिंग और क्रिएटिव स्किल्स भी बेहतर होती हैं.

पहचान में बदलाव (Transformation)

कुछ किशोर AI का इस्तेमाल अलग-अलग पहचान आजमाने या अपनी जिंदगी की परिस्थितियों को समझने के लिए करते हैं. वे ऐसे कैरेक्टर बनाते हैं जो उनकी असल जिंदगी के रिश्तों या अनुभवों से जुड़े होते हैं.

क्या सिर्फ बैन करना ही समाधान है?

AI पर पाबंदी लगाना सुरक्षा के लिए एक कदम हो सकता है लेकिन इससे युवाओं की क्रिएटिविटी और एक्सपेरिमेंट करने की आजादी भी प्रभावित होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर AI बनाने की जरूरत है ऐसा AI जो सुरक्षित भी हो और युवाओं की रचनात्मकता को बढ़ावा भी दे.

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