कभी-कभी कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो सीधे दिल को छू जाती हैं और हमें जिंदगी को देखने का नजरिया बदलने पर मजबूर कर देती हैं. झारखंड के गोड्डा से आई फैजान की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जहां शारीरिक चुनौतियों के बावजूद एक छात्र ने अपनी मेहनत और हौसले से इतिहास रच दिया.
संघर्ष से सफलता तक का सफर
गोड्डा जिले के रहने वाले फैजान ने मैट्रिक परीक्षा में 93.8 प्रतिशत अंक लाकर राज्य में पहला स्थान हासिल किया है.उनकी यह सफलता इसलिए और भी खास बन जाती है क्योंकि वे 100 प्रतिशत दिव्यांग हैं. वे अपने हाथों से नहीं लिख पाते, इसलिए मुंह से कलम पकड़कर परीक्षा देते हैं.यह सुनने में जितना कठिन लगता है, असल में उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है.
फैजान ने इन सभी मुश्किलों को अपने रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया. उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा और हर दिन मेहनत करते रहे.सीमित संसाधनों और कई तरह की परेशानियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को प्राथमिकता दी और आज उसी का परिणाम सबके सामने है.
इंटरव्यू में क्या बोले फैजान
फैजान ने बातचीत के दौरान बताया कि पढ़ाई के प्रति उनका रुझान शुरू से ही था.उन्होंने कहा कि शुरुआत में मुंह से लिखना बेहद कठिन था और इसमें काफी समय लगता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार अभ्यास और धैर्य के बल पर उन्होंने इसे अपनी ताकत बना लिया.उन्होंने यह भी बताया कि परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने पहले से तैयारी करके इसे संभाल लिया. फैजान का कहना है कि अगर इंसान ठान ले तो कोई भी काम असंभव नहीं होता.
बड़ा सपना और आगे की योजना
फैजान का सपना सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है.वे आगे भी उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते हैं और समाज में कुछ अलग करके दिखाना चाहते हैं. उन्होंने इच्छा जताई कि वे राज्य के मुख्यमंत्री से मिलें और अपनी कहानी के जरिए अन्य बच्चों को प्रेरित करें.उनका मानना है कि उनकी यह सफलता उन सभी बच्चों के लिए एक संदेश है, जो किसी न किसी वजह से खुद को कमजोर समझते हैं.फैजान चाहते हैं कि हर बच्चा अपने अंदर की ताकत को पहचाने और कभी हार न माने.
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परिवार और शिक्षकों की खुशी
फैजान की इस उपलब्धि से उनका परिवार बेहद खुश और भावुक है.परिवार वालों का कहना है कि उन्होंने हमेशा फैजान को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और आज उनकी मेहनत रंग लाई है.वहीं, स्कूल के शिक्षकों ने भी फैजान की जमकर तारीफ की है. उनका कहना है कि फैजान शुरू से ही मेहनती और लगनशील छात्र रहे हैं.उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों को बहाना नहीं बनाया, बल्कि उसे अपनी ताकत में बदल दिया.
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