क्या AI हमारी सोचने की क्षमता को कमजोर कर रहा है? रिपोर्ट में हो गया हैरान करने वाला खुलासा

क्या AI हमारी सोचने की क्षमता को कमजोर कर रहा है? रिपोर्ट में हो गया हैरान करने वाला खुलासा


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  • AI पर निर्भरता से समस्याओं को हल करने में रुचि घटी

Artificial Intelligence: आजकल लोग छोटी-बड़ी हर समस्या के लिए AI टूल्स का सहारा लेने लगे हैं. सवाल पूछना हो, मैथ सॉल्व करना हो या किसी टॉपिक को समझना सब कुछ कुछ सेकंड में मिल जाता है. लेकिन जहां ये तकनीक काम को आसान बनाती है वहीं इसके कुछ ऐसे असर भी सामने आ रहे हैं जिन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा.

दिमाग पर AI का असर क्या कहता है नया अध्ययन?

एक हालिया रिसर्च में यह सामने आया कि AI की मदद से लोग अपने काम तेजी से पूरा कर लेते हैं खासकर जब बात कठिन सवालों या लॉजिक से जुड़े टास्क की हो. यानी जब तक AI साथ होता है प्रदर्शन अच्छा दिखता है. लेकिन असली समस्या तब सामने आई जब शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों से AI की मदद हटा दी. जैसे ही यह सहारा खत्म हुआ, लोगों की परफॉर्मेंस में गिरावट देखने को मिली. वे ज्यादा गलतियां करने लगे और कठिन सवालों को हल करने में उनकी रुचि भी कम हो गई.

कुछ ही मिनटों का असर

इस अध्ययन में यह भी देखा गया कि सिर्फ 10 मिनट तक AI की मदद लेना ही काफी था जिससे लोगों की स्वतंत्र सोच और समस्या सुलझाने की क्षमता पर असर पड़ा. यानी कम समय का इस्तेमाल भी लंबे समय के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है.

अलग-अलग समूह, एक जैसा नतीजा

शोध में सैकड़ों लोगों को शामिल किया गया और उन्हें अलग-अलग टास्क दिए गए. कुछ को गणित के सवाल हल करने थे जबकि कुछ को समझने वाले पैराग्राफ पढ़ने थे. दिलचस्प बात यह रही कि सभी समूहों में एक जैसी प्रवृत्ति देखी गई AI के बिना उनकी परफॉर्मेंस कमजोर हो गई.

क्यों चिंता की बात है?

इस विषय पर काम करने वाले शोधकर्ता रचित दुबे के अनुसार, यह सिर्फ गलत जवाब देने का मामला नहीं है. असली चिंता यह है कि लोग धीरे-धीरे खुद सोचने की आदत खो सकते हैं. अगर हर काम के लिए AI पर निर्भरता बढ़ती गई तो इंसान में धैर्य कम हो सकता है और वह खुद से समस्याएं हल करने से बचने लगेगा.

संतुलन ही है समाधान

AI एक शक्तिशाली टूल है लेकिन इसका सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है. अगर इसे सिर्फ सहायक की तरह इस्तेमाल किया जाए और अपनी सोच को एक्टिव रखा जाए तो यह फायदेमंद साबित हो सकता है. वरना, ज्यादा निर्भरता हमारी सोचने और समझने की क्षमता को धीरे-धीरे कमजोर कर सकती है.

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