चुपके से US को झटका देकर ‘धुरंधर’ बना भारत, ईरान को चीनी युआन में किया तेल का बड़ा पेमेंट

चुपके से US को झटका देकर ‘धुरंधर’ बना भारत, ईरान को चीनी युआन में किया तेल का बड़ा पेमेंट


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  • अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली राहत, ईरान से भारत ने खरीदा तेल।
  • भुगतान डॉलर की जगह चीनी मुद्रा युआन में किया गया।
  • युआन में डील से डॉलर पर निर्भरता कम होगी।
  • पश्चिम एशिया तनाव के चलते तेल कीमतों में राहत मिली।

India-Iran Oil Deal: अमेरिका के प्रतिबंधों से मिली एक महीने की अस्थायी राहत का फायदा उठाते हुए भारतीय रिफाइनर्स कंपनियों ने ईरान से तेल की खरीदारी की है. सबसे खास बात यह रही कि इस बार भुगतान डॉलर की जगह चीनी मुद्रा युआन में किया गया. जो पिछले कई सालों में एक अलग रुख दिखाता है. भारतीय रिफाइनर्स के ईरान से फिर से तेल खरीदने के बीच इस पूरे सौदे में पेमेंट का तरीका सबसे ज्यादा चर्चा में है. 

युआन में क्यों की गई डील?

भारत और ईरान के बीच हुए इस सौदे में भुगतान का तरीका सबसे खास रहा. भारतीय कंपनियों ने डॉलर की जगह चीनी मुद्रा युआन में पेमेंट की हैं. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस ने ICICI बैंक के जरिए यह भुगतान किया हैं. जिसे बैंक की शंघाई शाखा से प्रोसेस किया गया है. हालांकि, इन विक्रेताओं की पहचान अभी साफ नहीं हो पाई है.

ईरान पर लंबे समय से लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते डॉलर में भुगतान करना लगभग संभव नहीं है. ऐसे में अमेरिका की ओर से मिली 30 दिनों की अस्थायी छूट का फायदा उठाने के लिए भारतीय कंपनियों ने चीनी मुद्रा को विकल्प के तौर पर चुना. 

भारत को क्या होगा फायदा?

युआन में पेमेंट होने से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत अब ऐसे सौदों में सिर्फ डॉलर पर निर्भर नहीं रहना चाहता हैं. देश दूसरे विकल्प भी तलाश रहा हैं. खासकर जब बात प्रतिबंधित देशों से तेल खरीदने की हो. ईरान जैसे देशों से दूसरी मुद्रा में भारत की यह डील नए रास्ते खोल सकता है.  

ऐसे कदमों से आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार में बदलाव आ सकते हैं. जहां अलग-अलग देशों की करेंसी में लेनदेन का चलन बढ़ सकता है. जिससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने में सहायता होगी.  

अमेरिका ने दी राहत

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल के दाम तेजी से ऊपर जा रहे थे. ऐसे में ट्रंप प्रशासन ने थोड़ी राहत देने का फैसला लिया हैं. रूसी और ईरानी कच्चा तेल जो पहले से समुद्र में था, उसे खरीदने पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में ढील दी गई है. जिससे कीमतों को कुछ समय तक कंट्रोल में रखा जा सके. 

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