‘कोई नहीं जानता बॉस क्या करेंगे’, 2 अप्रैल की टैरिफ डेडलाइन से पहले ट्रंप के करीबी ने ऐसा क्यों
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Donald Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ डेडलाइन 2 अप्रैल जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, ट्रंप प्रशासन के भीतर कन्फ्यूजन बढ़ रहा है. पॉलिसी बनाने में अंदरूनी कलह और अचानक फैसलों ने व्हाइट हाउस के अधिकारियों को भ्रमित कर दिया है.
पोलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और चीफ ऑफ स्टाफ सूजी विल्स सहित शीर्ष अधिकारी भी इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि ट्रंप वास्तव में क्या करने वाले हैं. व्हाइट हाउस के एक सहयोगी ने कहा,”कोई नहीं जानता कि क्या हो रहा है.”
अचानक बदलाव से व्यापार क्षेत्र में चिंता
हाल ही में ऑटोमोबाइल उद्योग पर 25% टैरिफ लगाने का ट्रंप प्रशासन का अचानक लिया गया फैसला इस अनप्रेडिक्टेबल पॉलिसी-मेकिंग का उदाहरण है. यह निर्णय इतनी जल्दी लिया गया कि इससे व्हाइट हाउस की अन्य योजनाएं प्रभावित हुईं और उद्योग जगत को बिना तैयारी के छोड़ दिया. व्यवसाय और निवेशक चिंतित हैं क्योंकि ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ऑटो कंपनियां टैरिफ की भरपाई के लिए कारों की कीमतें बढ़ाती हैं तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता.
वैश्विक व्यापार भागीदारों में चिंता
ट्रंप प्रशासन का उद्देश्य रेसिप्रोकाल टैरिफ लागू करना है, जिससे उन शुल्कों का मुकाबला किया जा सके जो अन्य देश अमेरिकी निर्यात पर लगाते हैं. हालांकि, इस नीति की स्पष्ट जानकारी न होने के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार साझेदारों को संघर्ष करना पड़ रहा है. कुछ देशों ने पहले ही प्रभाव को कम करने के उपाय शुरू कर दिए हैं. कनाडा ने 12 अमेरिकी राज्यों में एक अभियान शुरू किया है जिसमें बिलबोर्ड और विज्ञापन के माध्यम से जनता को टैरिफ के प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है.
भारत पर संभावित प्रभाव
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग भी अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हो सकता है. ट्रंप प्रशासन की 25% टैरिफ नीति भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माताओं और ऑटो पार्ट्स निर्यातकों के लिए चुनौती बन सकती है. विश्लेषकों का अनुमान है कि इस टैरिफ से भारतीय ऑटो पार्ट्स कंपनियों के परिचालन मार्जिन में 125-150 आधार अंकों की गिरावट हो सकती है. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पर कुल प्रभाव सीमित रहेगा, क्योंकि अमेरिका को भारतीय ऑटो निर्यात की मात्रा कम है. अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या 2 अप्रैल वास्तव में “लिबरेशन डे” होगा या फिर वैश्विक व्यापार में नई चुनौतियां लेकर आएगा.
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