IMF on Iran War: ईरान युद्ध की वजह से ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान में कमी का आकलन किया गया है. यह कहना इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा का है. उन्होंने कहा है कि मध्यपूर्व में युद्ध की वजह से ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान को कम करेगा. गुरुवार को वॉशिंगटन में जॉर्जीवा ने कहा कि इस संघर्ष ने इस क्षेत्र और पूरी दुनिया में काफी मुश्किलें पैदा कर दी हैं, जिसके चलते ऐसा करना पड़ रहा है.
अगर झटका नहीं लगा होता तो…
जॉर्जीवा का कहना है कि अगर यह झटका नहीं लगा होता तो दुनिया आज जिस स्थिति में है, उससे कहीं बेहतर होती. हम अपने ग्रोथ के आंकलन को बढ़ा रहे होते, लेकिन अब हमारे अनुमान में इसे कम करना पड़ेगा. इससे पहले ग्लोबल ग्रोथ को बढ़ाकर 3.3% कर दिया था. ऐसे में मंगलवार को आने वाले अनुमान में इन्हें बढ़ाने की तैयारी थी. लेकिन 28 फरवरी को हुए युद्ध ने सारी स्थिति को बदलकर रख दिया है.
मिडिल ईस्ट के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था चपेट में आई है
मिडिल ईस्ट के संघर्ष के चलते और ईरान की तरफ से वैश्विक मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के बाद तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें बढ़ गई हैं. इस युद्ध में हमलों के दौरान तेल रिफाइनरियों, टैंकर टर्मिनलों और अन्य ऊर्जा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है. दुनिया भर के किसान जिस फर्टिलाइजर पर निर्भर हैं, उसकी सप्लाई में भी कमी दुनिया के स्तर पर देखी गई है. इसके अलावा गैस और तेल की सप्लाई में आई भारी कमी के चलते बिजनेस और कंज्यूमर पर असर हुआ है.
IMF, वर्ल्ड बैंक और WFP ने जारी किया संयुक्त बयान
IMF, वर्ल्ड बैंक और WFP ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में सबसे बड़ी मुश्किल पैदा कर दी है. इससे खाद्य कीमतों, फूड सिक्योरिटी पर गहरा असर पड़ेगा. इन तीनों संस्थाओं ने एक संयुक्त बयान जारी कियाहै. इसमें कहा गया है कि बढ़ती खाद्य कीमतों का सबसे अधिक बोझ दुनिया की कमजोर आबादी पर रहेगा. तेल, गैस और उर्वरक की कीमतों में तेज वृद्धि, साथ ही परिवहन बाधाओं के कारण, खाद्य कीमतों और खाद्य असुरक्षा में वृद्धि अवश्य होगी.
संस्थाओं ने कहा कि वे इस स्थिति की गहन निगरानी करेंगे और संकट से प्रभावित लोगों का समर्थन करने के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का समन्वय करेंगे. बयान में यह भी कहा गया कि विशेष रूप से कम आय वाले और आयात-निर्भर देशों में, ईंधन और खाद्य कीमतों में वृद्धि सरकारों की सीमित वित्तीय क्षमता के कारण कमजोर घरों पर सबसे अधिक प्रभाव डालेगी. तीनों संस्थाओं ने आश्वासन दिया कि वे जीवन और आजीविका की रक्षा, और स्थिरता, विकास और रोजगार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दीर्घकालिक पुनर्प्राप्ति के लिए समर्थन जारी रखेंगी.
हाल ही में हुआ है ईरान-अमेरिका के बीच दो हफ्तों का सीजफायर
हालांकि, इस युद्ध में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट मंगलवार को देखने को मिला है. जब ईरान और अमेरिका ने सीजफायर की घोषणा की. यह घोषणा उस वक्त की गई, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा था कि आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी. इस युद्ध से हुए नुकसान का असर IMF के मैनेजिंग डायरेक्टर के इस बयान से लगाया जा सकता है. अमेरिका सशर्त दो हफ्तों के सीजफायर पर सहमत हुआ है.
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