Vallabhacharya Jayanti 2026: वल्लभाचार्य जयंती क्यों मनाई जाती है, जानें श्रीनाथ जी से क्या है

Vallabhacharya Jayanti 2026: वल्लभाचार्य जयंती क्यों मनाई जाती है, जानें श्रीनाथ जी से क्या है


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  • इस दिन भक्त श्रीकृष्ण और श्रीनाथ जी की पूजा करते हैं।

Vallabhacharya Jayanti 2026: श्रीकृष्ण के अनेक भक्तों में से एक है संत शिरोमणि वल्लभाचार्य. हर साल वल्लभाचार्य जयंती 13 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. इस साल श्री वल्लभाचार्य की 547वीं जन्म वर्षगांठ है. उन्होंने हिंदू धर्म में पुष्टिमार्ग की स्थापना की, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति पर आधारित है. पुष्टि मार्ग को वल्लभ सम्प्रदाय के नाम से भी जाना जाता है. खासतौर पर श्रीनाथ जी की पूजा करने वालों के लिए ये दिन बहुत खास है.  

कौन थे वल्लभाचार्य जी

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्री वल्लभाचार्य को श्रीनाथ जी का ही स्वरूप माना जाता है. वल्लभाचार्य का जन्म 1479 ईस्वी में वर्तमान चंपारण (बिहार) में हुआ था. इनके पिता का नाम लक्ष्मण भट्ट और माता का नाम इलम्मा था. बचपन से ही वे अत्यंत प्रतिभाशाली और धार्मिक प्रवृत्ति के थे. उन्होंने कम उम्र में ही वेद, उपनिषद और शास्त्रों का गहरा ज्ञान प्राप्त कर लिया था.

Vallabhacharya Jayanti 2026: वल्लभाचार्य जयंती क्यों मनाई जाती है, जानें श्रीनाथ जी से क्या है इनका संबंध

जन्म के समय दिखाई अपनी लीला

श्री वल्लभाचार्य जी का जब जन्म हुआ तब उनमें कोई चेतना नहीं थी. ऐसे में दुखी मन से उनके माता पिता उन्हें मृत समझकर छोड़ दिया था. ऐसे में श्री नाथ जी में श्री वल्लभ आचार्य की माता इल्लामागारू को सपने में दर्शन दिया और कहा कि जिस शिशु को तुम छोड़ आए हो वो जीवित है. तुम्हारे गर्भ से स्वयं श्रीनाथ ने जन्म लिया है. भगवान की अद्भुत वाणी सुनकर जब उनके माता- पिता वहां गए तो देखा कि शिशु के चारों तरह आग की लपटें हैं और वो बीच में बड़ी शांति से अंगूठा चूस रहे थे.

क्यों मनाई जाती है वल्लभाचार्य जयंती

वल्लभाचार्य जी ने “सेवा भाव” को भक्ति का मुख्य आधार बनाया, जिसमें भगवान को बच्चे की तरह प्रेम और सेवा से पूजा जाता है, जैसे उन्हें भोजन कराना, सजाना और सुलाना. उन्हें पूजने वाले वल्लभाचार्य जी को श्रीनाथ जी का प्रकट स्वरूप मानकर इस दिन को धूमधाम से मनाते हैं.

श्रीनाथजी को मुख्य रूप से भक्ति योग के अनुयायियों और गुजरात और राजस्थान में वैष्णव और भाटिया एवं अन्य लोगों द्वारा पूजा जाता है.

वल्लभाचार्य जयंती पर क्या करते हैं

श्रीकृष्ण के भक्त इस दिन सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण, विशेष रूप से श्रीनाथजी की पूजा करते हैं. मंदिरों में भजन-कीर्तन, आरती और प्रवचन आयोजित किए जाते हैं. भक्तजन दिनभर कान्हा की भक्ति में ली रहते हैं.  शास्त्रों का पाठ करते हैं और वल्लभाचार्य जी की शिक्षाओं को सुनते हैं.

वल्लभाचार्य जी के विचार

वल्लभाचार्य अनुसार तीन ही तत्व हैं ब्रह्म, ब्रह्मांड और आत्मा. अर्थात ईश्वर, जगत और जीव. उक्त तीन तत्वों को केंद्र रखकर ही उन्होंने जगत और जीव के प्रकार बताए और इनके परस्पर संबंधों का खुलासा किया.

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