ब्लू-कॉलर जॉब्स का ट्रेंड! बढ़ई ने की 45 मिनट में 900 रुपए की कमाई, वायरल पोस्ट पर छिड़ी बहस

ब्लू-कॉलर जॉब्स का ट्रेंड! बढ़ई ने की 45 मिनट में 900 रुपए की कमाई, वायरल पोस्ट पर छिड़ी बहस


Viral Post : आज के समय में जब एआई (Artificial Intelligence) और ऑटोमेशन के चलते लोगों को नौकरी खोने का डर सताने लगा है, वहीं सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट ने लोगों की सोच बदल दी है. यह पोस्ट खासतौर पर उन लोगों के लिए है जो करियर की दिशा तय करने में उलझन महसूस कर रहे हैं. इस पोस्ट में बताया गया कि कैसे एक शख्स ने सिर्फ 45 मिनट के काम के लिए एक कारपेंटर को 900 रुपए दिए. यह काम सिर्फ कुछ शेल्फ लगाना और पेंटिंग्स टांगने तक सीमित था. अब इस पोस्ट ने एक बड़ा सवाल उठाया है कि क्या ब्लू-कॉलर जॉब्स यानी हाथ से काम करने वाले प्रोफेशन फ्यूचर में ज्यादा सुरक्षित और फायदे वाले हो सकते हैं. 

ब्लू-कॉलर जॉब्स क्यों बन रहे हैं नया ट्रेंड ?

पोस्ट लिखने वाले यूजर ने कहा कि ब्लू-कॉलर जॉब्स फ्यूचर हैं. युवाओं के लिए स्किल-आधारित ट्रेनिंग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, पुराने डिग्री को नहीं, एआई से कोई खतरा नहीं. इसका मतलब साफ है कि हाथ से काम करने वाले प्रोफेशन जैसे कि कारपेंटर, प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल वर्क आने वाले समय में और भी मांग में रह सकते हैं. कई लोगों ने इस विचार से सहमति जताई और कहा कि इन स्किल्स की कीमत अक्सर कम आंकी जाती है, जबकि इसमें काफी मेहनत और विशेषज्ञता की जरूरत होती है. 

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एआई का असर क्यों ज्यादा

डिजिटल और डेस्क-बेस्ड जॉब्स पर ऑटोमेशन का सबसे ज्यादा असर होता है. वहीं, हाथ से किए जाने वाले कामों को मशीनों से पूरी तरह से रिप्लेस करना मुश्किल है. इसलिए, कुछ लोग मानते हैं कि फ्यूचर में इन प्रोफेशन की मांग बढ़ सकती है और साथ ही सैलरी भी बेहतर हो सकती है. 

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस 

हर कोई इस पोस्ट से सहमत नहीं है. कई लोगों का मानना है कि इस मुद्दे को बहुत आसान तरीके से पेश किया जा रहा है, जबकि असलियत इससे कहीं ज्यादा मुश्किल है. कई लोगों का कहना है कि इन कामों में कमाई हमेशा एक जैसी नहीं रहती, कभी काम ज्यादा मिलता है, तो कभी बिल्कुल कम, इसलिए इनकम तय नहीं होती, इसके अलावा, कमाई इस बात पर भी निर्भर करती है कि आप किस शहर या इलाके में काम कर रहे हैं, वहां काम की कितनी मांग है और आपको कितने मौके मिल रहे हैं. कुछ लोगों ने यह भी चिंता जताई कि अगर वाइट-कॉलर जॉब्स पर एआई का ज्यादा असर पड़ा और लोगों की आमदनी कम हुई, तो उनकी खर्च करने की क्षमता भी घटेगी. ऐसे में घर की मरम्मत, फर्नीचर या दूसरी सेवाओं की मांग भी कम हो सकती है, जिसका असर इन कामों पर पड़ेगा. 

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