तलाक के बाद कोर्ट ऐसे तय करता है एलिमनी का अमाउंट, इन बातों का रखा जाता है ध्यान

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Chahal Verma Divorce: क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और कोरियोग्राफर धनश्री वर्मा शादी के 51 महीनों बाद अलग हो गए. इनके बीच 4.75 करोड़ रुपये में सेटलमेंट हुआ है. यानी कि चहल एलिमनी के तौर पर धनश्री को 4.75 करोड़ रुपये देंगे. इसमें से 2.37 करोड़ रुपये वह पहले ही दे चुके हैं. अब सवाल यह आता है कि आखिर कोर्ट डिवोर्स के मामले में एलिमनी कैसे तय करती है? 

कोर्ट कैसे तय करता है एलिमनी? 

वैसे तो तलाक के बाद एलिमनी के तौर पर कितना पैसा दिया जाना है इसका कोई तय नियम नहीं है. इसके लिए कोर्ट कई बातों का ध्यान रखती है जैसे कि पति-पत्नी की कमाई कितनी है, उनका फाइनेंशियल स्टेटस कैसा है, उनकी सेविंग्स कितनी है, शादी कितनी लंबी रही है, बच्चों की देखभाल के लिए क्या किया गया है वगैरह. 

पत्नी अगर वर्किंग हो तो…

इसमें एक और सवाल यह आता है कि अगर पत्नी खुद जॉब कर रही हो, तो भी क्या तलाक होने पर उसे एलिमनी देना पड़ेगा ? इस स्थिति में कोर्ट देखता है कि दोनों कितना कमाते हैं और दोनों की आय में कितना अंतर है. अगर कोर्ट को ऐसा लगता है कि पत्नी इतना कमा लेती है कि वह अपना भरण पोषण खुद से कर सके तो एलिमनी के लिए मना भी किया जा सकता है. 

इसी के साथ अगर पत्नी पढ़ी-लिखी है, लेकिन पति के परिवार के साथ रहती है और उन्हें संभालती है. पति के काम या बिजनेस में भी हाथ बंटाती है, तो इस स्थिति में कोर्ट मानेगा कि लड़की ने अपने पति के परिवार के साथ अपने करियर का त्याग दिया है इसलिए तलाक के बाद गुजारा भत्ता इतना तय किया जाएगा कि उसकी जिंदगी सही से कट सके. 

क्या पति भी कर सकते हैं एलिमनी के लिए क्लेम?

एलिमनी को लेकर एक और बड़ा सवाल यह है कि क्या तलाक के बाद पत्नी से भी पति को एलिमनी मिलने की कोई संभावना है? तो इसका जवाब है हां. हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 में धारा 24 और 25 के तहत पति भी एलिमनी या गुजारा भत्ते के लिए क्लेम कर सकता है. बशर्ते पति को यह साबित करना होगा कि वह आर्थिक रूप से पत्नी पर निर्भर है जैसे कि उसे कोई बीमारी है या वह विकलांग है, जिसके चलते काम कर पाने में असमर्थ है. 

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