फुलेरा दूज कैसे और क्यों मनाते हैं, राधा-श्रीकृष्ण का क्या है संबंध
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फुलेरा दूज के दिन को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है. मतलब इस दिन किसी भी शुभ काम को करने के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती. गृह प्रवेश, विवाह, नए कार्य की शुरुआत के लिए आज का दिन बहुत श्रेष्ठ है.

पौराणिक कथा के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर श्रीकृष्ण और राधा रानी ने फूलों से होली खेली थी, तभी से फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाता है. यह पर्व होली की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.

फुलेरा दूज के दिन को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है. मतलब इस दिन किसी भी शुभ काम को करने के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती. गृह प्रवेश, विवाह, नए कार्य की शुरुआत के लिए आज का दिन बहुत श्रेष्ठ है.

फुलेरा दूज के दिन को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है. मतलब इस दिन किसी भी शुभ काम को करने के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती. गृह प्रवेश, विवाह, नए कार्य की शुरुआत के लिए आज का दिन बहुत श्रेष्ठ है.

प्रेम प्राप्ति और सुखी दांपत्य जीवन के लिए फुलेरा दूज पर “ॐ क्लीं कृष्णाय गोपीजन वल्लभाय स्वाहा” मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण की पूजा करें. गाय को भोजन खिलाएं और गीता का पाठ करें.

अपने लव पार्टनर से शादी में कोई विघ्न आ रहा है तो फुलेरा दूज के दिन भोजपत्र पर पीले रंग के चंदन से प्रेमी का नाम लिखें राधा-कृष्ण मंदिर में अर्पित करें. कहते हैं इससे लव लाइफ में चल रही समस्याओं का अंत होगा.
Published at : 01 Mar 2025 12:52 PM (IST)
Tags :
Phulera Dooj 2025 Falgun Dooj 2025
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