बजट 2025: वित्त मंत्री के कार्मिकों की सूची 1 फरवरी को बजट पेश करने वाली है, जिस पर पूरे देश की सहमति टिकी हुई है। बजट को लेकर देश के हर सेक्टर के बारे में कुछ न कुछ बताया जाता है। अनुमान लगाया जा रहा है कि बजट में डिफेंस सेक्टर को लेकर कुछ बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं।
बहुसंख्यक चुनौती के बीच सेना को मजबूत बनाना जरूरी
इस वक्ता ग्लोबल प्लाज्मा चिंता का विषय बना हुआ है। एक तरफ रूस और जापान के बीच जंग जारी है, इजराइल और हमास में भी तकरार की कमाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ भारत की सीमाओं पर भी तनाव का माहौल है। इसके अंतर्राष्ट्रीय डिफेंस सेक्टर में होने वाले खर्च में अंतर हो गया है।
विश्व स्तर पर सैन्य क्षेत्र में सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देश में एक डिफेंस सेक्टर पर भारत का खर्च सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत से भी कम है। साल 2022 में भारत ने अपनी कुल जीडीपी का 2.4 प्रतिशत रक्षा क्षेत्र पर खर्च किया। इस मामले में भारत चीन से भी पीछे है। आने वाले समय में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सेना की सही तैयारी जरूरी है, सुरक्षा क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
सीमा की सुरक्षा के लिए अधिक निवेश की आवश्यकता है
आम तौर पर पेंशन की तरह ही कुछ फ्री फिक्स्ड बजट रखा जाता है। इसके बजट में घाटे जैसे कई सेक्टरों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है. जबकि देश की सुरक्षा के लिए रक्षा क्षेत्र की संपत्ति सूची में रखना आवश्यक है। एक तरफ चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ भारत का तनाव बरकरार है। निवेशकों पर निवेशकों की नजर
देश के अंदर भी कम नहीं है पहचान
इसके अलावा, देश में उग्रवाद, बौद्धवाद, स्मारकों का भी खतरा बना रहता है इसलिए मोर्टार की ट्रेनिंग से लेकर राइफल ऑपरेशन, अर्धसैनिक एकजुटता और कानूनी निर्देशन निर्देशन को भी आधुनिक उपकरण और मजबूती से मजबूत बनाना जरूरी है।
आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत यह जरूरी है कि डिफेंस सेक्टर में भी देश आत्मनिर्भर बने। इसके लिए देश में ही रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए निवेश करना होगा।
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