
असमंजस में दिखने वाला महाकुंभ हिंदू धर्म का सबसे विशाल धार्मिक आयोजन है। इस दौरान देश-दुनिया के लाखों खतरे शामिल होते हैं और पवित्र त्रिवेणी संगम पर आस्था की पहुंच होती है।

आज 13 जनवरी से अलौकिक महाकुंभ की शुरुआत हो रही है, जिसका समापन 26 फरवरी 2025 को महाकुंभ पर होगा। आज पौष पूर्णिमा के दिन पहला शाही स्नान किया जाएगा।

बता दें कि जब देवगुरु बृहस्पति 12 का भ्रमण चक्र पूर्ण कर धनु राशि में आते हैं, तब महाकुंभ का आयोजन होता है। पौराणिक कथा के अनुसार जब देव और असुरों के बीच युद्ध हुआ, तब असुरों के गुरु शुक्र थे, जो इस बार राहु-केतु के साथ थे। वहीं देवगुरु बृहस्पति शुक्र की राशि में हैं।

ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि, बुध मकर राशि में बुधादित्य योग बन रहा है। कुम्भ योग और राशि परिवर्तन योग भी अतिशुभ है। वहीं कुंभ राशि और शुक्र और गुरु की राशि परिवर्तन की दुर्लभ स्थिति का संयोग बना है।

आज बुधादित्य योग, कुंभ योग, श्रवण नक्षत्र और सिद्धि योग बनता है। महाकुंभ में पूरे 144 साल बाद समुद्र तट पर मठ जैसे बने योग भी आस्था त्रिवेणी संगम पर पहला शाही स्नान करेंगे।

सूर्य, चन्द्रमा और शनि त्रिमक्र और कुम्भ राशि में स्थित हैं। संकेत का ये संयोग देवासुरबात के समय बना था. साथ ही श्रवण नक्षत्र सिद्धि योग में सूर्य-चंद्र की स्थिति और उच्च शुक्र और कुंभ राशि के शनि के कारण कुंभ स्नान परम योगकारी महासिद्ध होगा।
पर प्रकाशित: 13 जनवरी 2025 09:51 पूर्वाह्न (IST)





