स्मार्टफोन के अतिरिक्त इस्तेमाल से तनाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं

स्मार्टफोन के अतिरिक्त इस्तेमाल से तनाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं


टेक्नोलॉजी ने हर इंसान की जिंदगी को जरूर बनाया है, क्योंकि (मोबाइल फोन) के इस्तेमाल से आप घर बैठे पूरी दुनिया में कहीं भी बात कर सकते हैं। दवाओं का परिवहन कर सकते हैं, खरीदारी कर सकते हैं, ऑफ़लाइन कक्षाओं में भाग ले सकते हैं, बच्चों के लिए भी यह काफी उपयोगी हो सकता है।

टेक्नोलॉजी ने हर इंसान की जिंदगी को जरूर बनाया है, क्योंकि (मोबाइल फोन) के इस्तेमाल से आप घर बैठे पूरी दुनिया में कहीं भी बात कर सकते हैं। दवाओं का परिवहन कर सकते हैं, खरीदारी कर सकते हैं, ऑफ़लाइन कक्षाओं में भाग ले सकते हैं, बच्चों के लिए भी यह काफी उपयोगी हो सकता है।

लेकिन इसकी लत बच्चों से लेकर बड़ों तक लग गई है, हाल ही में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, इसके सबसे ज्यादा इस्तेमाल से आपका मानसिक स्वास्थ्य (मानसिक स्वास्थ्य) खराब हो सकता है।

लेकिन इसकी लत बच्चों से लेकर बड़ों तक लग गई है, हाल ही में हुई एक रिसर्च के मुताबिक, इसके सबसे ज्यादा इस्तेमाल से आपका मानसिक स्वास्थ्य (मानसिक स्वास्थ्य) खराब हो सकता है।

आइये आपको इस रिसर्च के बारे में और कैसे अपने दिमाग को खोखला कर सकते हैं।

आइये आपको इस रिसर्च के बारे में और कैसे अपने दिमाग को खोखला कर सकते हैं।

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हाल ही में हुई एक रिसर्च केटेक और सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल मेंटल हेल्थ पर असर के अनुसार किया गया है। इससे इमोशनल और साइकोलॉजिकल बाजारू पैदा हो सकते हैं। अध्ययन में बताया गया है कि सोशल प्लेटफॉर्म मीडिया पर लगातार आने वाले अपडेट्स से फीयर ऑफ मिसिंग आउट (FOMO) की समस्या बढ़ रही है। इसमें लोगों को जरूरी अपडेट से फेल होने का डर महसूस होता है, इसलिए वह बार-बार अपने फोन पर अटेच अपडेट चेक करते रहते हैं।

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में हाल ही में हुई एक रिसर्च केटेक और सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल मेंटल हेल्थ पर असर के अनुसार किया गया है। इससे इमोशनल और साइकोलॉजिकल बाजारू पैदा हो सकते हैं। रिसर्च में बताया गया है कि सोशल प्लेटफॉर्म मीडिया पर लगातार अपडेट्स से लेकर मिसिंग आउट (FOMO) की समस्या बढ़ रही है। इसमें लोगों को जरूरी अपडेट से फेल होने का डर महसूस होता है, इसलिए वह बार-बार अपने फोन पर अटेच अपडेट चेक करते रहते हैं।

नींद से सम्बंधित समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। रिलेटिव,टेक्नोलॉजी की स्क्रीन से दूर वाली एल्युमीनियम लाइटाटोनिन के उत्पादन को दबा दिया जाता है, जिससे स्लीप की गुणवत्ता कम हो जाती है और नींद की गुणवत्ता में कमी से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और तनाव और एंजाइटी का खतरा बढ़ जाता है।

नींद से सम्बंधित समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। रिलेटिव,टेक्नोलॉजी की स्क्रीन से दूर वाली एल्युमीनियम लाइटाटोनिन के उत्पादन को दबा दिया जाता है, जिससे स्लीप की गुणवत्ता कम हो जाती है और नींद की गुणवत्ता में कमी से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है और तनाव और एंजाइटी का खतरा बढ़ जाता है।

सोने से पहले टेक्नोलॉजी चेक करने की आदतें खराब हो जाती हैं और कहा जाता है कि सोने से 1 से 2 घंटे पहले ही हाई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बंद कर दिया जाता है, जिससे नींद बेहतर और बेहतर हो जाती है।

सोने से पहले टेक्नोलॉजी चेक करने की आदतें खराब हो जाती हैं और कहा जाता है कि सोने से 1 से 2 घंटे पहले ही हाई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बंद कर दिया जाता है, जिससे नींद बेहतर और बेहतर हो जाती है।

लोगों को लगता है कि सोशल प्लेटफॉर्म मीडिया पर एक्टिव रहने से आपका सोशल मीडिया बड़ा होता है और आप लोग इंटरेक्ट कर पाते हैं, जबकि रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल आपको स्ट्रेस दे सकता है। असल में, सोशल मीडिया पर ज्यादातर समय शामिल से लोग एक दूसरे से खुद की तुलना करते हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य इश्यू पैदा होते हैं। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर ज्यादा समय तक रहने से लोग ज्यादा से ज्यादा खरीदारी भी करते हैं और कई बार बिना यूज़ की सामग्री भी प्रचलित हैं, जिससे नंगा स्ट्रेस का सामना भी करना पड़ सकता है, इसलिए सोशल मीडिया से दूरी बनाने की सलाह भी सोशल मीडिया पर दी जाती है। .

लोगों को लगता है कि सोशल प्लेटफॉर्म मीडिया पर एक्टिव रहने से आपका सोशल मीडिया बड़ा होता है और आप लोग इंटरेक्ट कर पाते हैं, जबकि रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल आपको स्ट्रेस दे सकता है। असल में, सोशल मीडिया पर ज्यादातर समय शामिल से लोग एक दूसरे से खुद की तुलना करते हैं, जिससे मानसिक स्वास्थ्य इश्यू पैदा होते हैं। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर ज्यादा समय तक रहने से लोग ज्यादा से ज्यादा खरीदारी भी करते हैं और कई बार बिना यूज़ की सामग्री भी प्रचलित हैं, जिससे नंगा स्ट्रेस का सामना भी करना पड़ सकता है, इसलिए सोशल मीडिया से दूरी बनाने की सलाह भी सोशल मीडिया पर दी जाती है। .

पर प्रकाशित: 28 दिसंबर 2024 09:11 पूर्वाह्न (IST)

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