
ठंड के साथ शरीर में ठंडक बढ़ती है। जब-जब मौसम में बदलाव होता है तो उसका असर मूड पर भी पड़ता है। कुछ लोगों में ये डिप्रेशन का रूप ले सकते हैं। यूक्रेन में कई-कई दिनों तक धूप के दर्शन नहीं होते हैं। इसका सीधा असर हमारे मूड पर है। इस दौरान बहुत से लोगों में चिड़चिड़ापन दिखता है, उन्हें उदासी मिलती है और बात-बात पर गुस्सा आता है। इसे शीत अवसाद (विंटर डिप्रेशन) कहा जाता है।

एक अध्ययन के अनुसार, ऐसा सूर्य की रोशनी से होता है, क्योंकि इसका मूड से गहरा नाता होता है। यही कारण है कि धूप के दिनों में धूप खिलने पर मूड अच्छा हो जाता है और धूप खिलने पर मूड खराब हो जाता है। ऐसे में आइये जानते हैं क्या है सांद्र अवसाद और इससे बचने के उपाय…

समुद्र में हमारी बॉडी के बायोलॉजिक क्लॉक में बदलाव काफी आम होते हैं। कम धूप की वजह से सेरोटोनिन लेवल में कमी आ जाती है, जिससे संत अवसाद की समस्या हो जाती है।

हमारे देश में हर साल ठंड के मौसम में करीब 1 करोड़ लोग सांता अवसाद की चपेट में आते हैं। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सुबह की धूप दिमाग के जागने और रहने की बहुत ज्यादा जरूरत होती है।

समुद्र तट पर सुबह की धूप जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारे दिमाग से स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसॉल रिलीज़ होता है, जो हमें जगाने और रहने के लिए तैयार करता है। सुबह की धूप से कॉर्टिसॉल शरीर मिल जाता है और अवसाद से मुक्ति हो जाती है। सुबह की धूप से हैप्पी हार्मोन डोपामाइन भी आदर्श है, जिससे मन खुश रहता है। इससे मन मोटिवेट भी रहता है।

नाश्ते के मौसम में सुबह की धूप स्वास्थ्य के लिए अच्छी होती है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर है। समुद्र में धूप से बचने के स्थान पर धूप में कुछ देर होनी चाहिए। खुली जगह धूप में बैठे से शरीर में विटामिन डी की कमी होगी और मौसमी प्रभाव वाले विकार जैसे थकान, चिड़चिड़ापन, सुस्ती और मूड से भी बचा जा सकता है।
प्रकाशित: 25 दिसंबर 2024 08:29 अपराह्न (IST)





