<पी शैली="पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;">इस वक्ता अतुल सुभाष की चर्चा पूरे देश में हो रही है। बेंगलुरु में अतुल सुभाष ने फैमिली कलह के आत्महत्या का कदम उठाया। दिवालियेपन से वह एक होटल इंजीनियर थे। लेकिन वास्तुशिल्प इंजीनियर बनने के लिए क्या होता है, आइए जानते हैं।
लाइफ स्टाइल्स का हिस्सा बन गया आर्टिफिशियल टेक्नॉलजी टेक्नोलॉजी की मांग पॉलिथीन जा रही है। लोग इसके दीवाने हो रहे हैं. कोरोना महामारी के बाद तो इसका स्वरूप और भी बढ़ गया है। आर्टिस्टिक सासायटी ने देश-विदेश से नए-नए अवसर पैदा किए हैं। पादरियों का कहना है कि अगले कुछ वर्षों में इसमें वृद्धि कर तीन गुना हो जाएगी।
यहां हैं
मशीन लर्निंग एंड शीट्स इन पीडियाग प्रोग्राम – अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान। (ओआईआईटी) – बैंगलोर, मुंबई – फाउंडेशन ऑफ आर्टिफिशियल इंजीनियरिंग और मशीन लर्निंग – आईओआईटी रेजिडेंट – आर्टिफिशियल इंजीनियरिंग और मशीन लर्निंग पोस्ट क्राफ्ट प्रोग्राम – महान शिक्षण संस्थान, अकादमी – फुल साइकोसाइकिल मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल कैथोलिक प्रोग्राम – जिगोसो अकादमी, बैंगलोर – आर्टिफिशियल फिजियोलॉजी एंड डीप लर्निंग पोस्ट में आर्टिफिशियल फिजियोलॉजी – मणिपाल पोलर्न, बेंगलुरु।
यहां से कर सकते हैं कोर्स
टीआईआई, खड़गपुर, दिल्ली, मुंबई, कानपूर, मद्रास, गिरजाघर, आबाद (www.iit.ac.in) – इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु (www.iisc.ernet.in) – पाठ्यपुस्तक सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली (www.nsit.ac.in) – बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स), पलानी (www. bits-pilani.ac.in)।
सीएटी सागर (सेंटर फ़ोर्टिफ़िशल सोसायटी ऐंड रोबोटिक्स), बेंगलुरु – नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग, मैसूर (www.nie.ac.in) – इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, अल्लाहाबाद (www.iiita.ac.in) – यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद (www.uohyd.ac.in) किसी भी विदेशी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की जा सकती है, इसलिए इसका मुफ्त ऑनलाइन कोर्स भी उपलब्ध है। अधिक जानकारी के लिए संस्थान की वेबसाइट देखें।
गूगल फ्री मशीन कोर्स कोचिंग कोर्स पूरा करना। यह छोटा सा अभ्यास है। ऐसे लोग कर सकते हैं जो अपनी क्षमता रखते हैं और अच्छा करना चाहते हैं।
ऐसे करें साहस की शुरुआत
होटल (एआई) कोर्स करने और इसमें वैज्ञानिक बनाने के लिए कंप्यूटर विज्ञान और गणित की जानकारी जरूरी है। इंजीनियरिंग करने के बाद इसमें इंजीनियरिंग की शुरुआत हो सकती है। यह डिग्री कंप्यूटर विज्ञान, तकनीकी प्रौद्योगिकी, गणित, इलेक्ट्रोनिक्स, इलेक्ट्रिकल्स जैसे विषयों में होनी चाहिए। कुछ तीर्थयात्रियों के लिए कोर्सेज में एंट्रेस एग्जामिनेशन पास करना होता है।"पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;">नाम से प्रतीत होता है कि यह कृत्रिम विशिष्टता है लेकिन वास्तव में यह डेटा सांख्यिकी और तिकड़म है। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग इंजीनियरिंग, रोबोटिक्स, मैथेमिक्स आदि इंजीनियरिंग के कई इंजीनियरों ने एक-एक जगह आर्टिफिशियल इंजीनियरिंग का निर्माण किया है। यानी इन कंप्यूटरों में अलग-अलग रेंज के अनुसार अपना फीडबैक फॉलोअर्स के लिए दिया जाता है।
ऐसे समझें
एक मशीन (कम्प्यूटर, रोबोट या कोई चिप) में शामिल किसी भी दुनिया भर का डेटा कर एक सॉफ्टवेयर तैयार किया जाता है। यह सॉफ़्टवेयर डेटा के आधार पर फ़ायरफ़ॉक्स का दस्तावेज़ीकरण करने में असमर्थ है। इसका आधार अलग-अलग कंडीशन में सही एक्शन फिल्में हैं। इसी तरह के रॉकेट को कलात्मक वैज्ञानिक (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कहा जाता है। इसमें सब कुछ डाटा पर मंजूरी दी गई है। अगर डेटा गलत है तो आर्टिफिशियल इंस्टीट्यूट सही काम नहीं करेगा। पूरी क्षमता से सही डेटा पर प्रतिबंध लगाया जाता है।
कितनी सरकारी नौकरी
आर्टिफिशियल तकनीक में डिग्री रखने वाले पेशवर की शुरुआती कीमत 50-60 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये प्रतिमाह तक हो सकती है। व्यवसायिक पेशेवरों के लिए नौकरी की संभावना सबसे अधिक कॉलेजों में है। दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद में भी इसका काफी दायरा है। यहां 10 लाख से लेकर 20 लाख तक की कमाई जारी है।
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