Raigarh Information: नहीं मिली एम्बुलेंस, ट्रैक्टर की ट्राली में लादकर पीएम के लिए लाना पड़ा शव
शहर की अगर यह स्थिति है तो धरमजयगढ़ कापू, छाल लैलूंगा जैसे सुदुरवर्ती इलाके की स्थिति को सहज ही समझा जा सकता है।
By Yogeshwar Sharma
Publish Date: Thu, 15 Feb 2024 12:43 AM (IST)
Up to date Date: Thu, 15 Feb 2024 12:43 AM (IST)

HighLights
- शहरी थाना क्षेत्र के उर्दना में रहने वाले युवक की लाश रामसिंह के कुएं में मिली
- ट्रैक्टर की ट्राली में लादकर शव को जिला अस्पताल लाना पड़ा।
- शहर में यह स्थिति तो ग्रामीण अंचल में सहज लगाया जा सकता है अनुमान
रायगढ़ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रायगढ़ शहर की एक घटना ने जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। विभाग द्वारा शव के सम्मान परिवहन पर लाखों रुपये खर्च करने का दावा किया जाता है। लेकिन आज भी लोगों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल रही है और लोगों को ट्रैक्टर की ट्राली में भरकर शव को पीएम के लिए लाना पड़ रहा है।
दो दिन से लापता वाहन चालक की लाश उसके ही गांव के एक ग्रामीण के कुएं में मिली। उसके लाश को पीएम के लिए अस्पताल लाने एम्बुलेंस नहीं मिला। ऐसे में ट्रैक्टर की ट्राली में लादकर शव को जिला अस्पताल लाना पड़ा।
जानकारी के मुताबिक अजीत उरांव पिता मन्द्रू उरांव (38) उर्दना थाना कोतवाली का रहने वाला था। अजीत पेशे से वाहन चलाक था। इसी से वह अपने परिवार का गुजर बसर करता था। वह दो दिन पहले वह एकाएक लापता हो गया था। ऐसे में स्वजनों ने अपने स्तर में काफी खोजबीन किए लेकिन उसका कुछ पता नही चला। तत्पश्चात गांव के सरपंच तथा अन्य लोगो के माध्यय से पुलिस को घटना से अवगत कराया। वहीं, आज सुबह राम सिंह उरांव अपने घर के बाड़ी की ओर गया था तभी उसे कुएं की ओर से तेज दुर्गंध आई, ऐसे में वह कुएं के पास गया और झांककर देखा तो एक व्यक्ति की लाश कुएं में नजर आया। कुएं में लाख मिलने की सूचना जंगल में आग की तरह पूरे गांव में फैल गई। गांव के सैकड़ो लोग मौके पर एकत्रित हो गए और इस घटनाक्रम की जानकारी कोतवाली पुलिस को भी दिए। तत्पश्चात कोतवाली पुलिस की मौजूदगी में गांव के ग्रामीणों ने किसी तरह कुएं से उनके पैरों तले जमीन खिसक गई । दरअसल जो लाश को कुएं से निकल गया,जिसमें उसकी पहचान चालक अजीत उरांव के रूप में हुआ । अजीत दो दिन से जबकि लापता था। इधर इस घटना की सूचना पाकर मृतक के स्वजन में हड़कंप मच गया। वे मौके पर आए और विलाप करने लगे। वहीं, कोतवाली पुलिस शव का पंचनामा करने के बाद पोस्टमार्टम करने के लिए अस्पताल लाने में लापरवाही बरतते हुए ट्रैक्टर में ले आए।
शहर में यह स्थिति तो ग्रामीण अंचल में सहज लगाया जा सकता है अनुमान
दूरस्थ ग्रामीण अंचल में नक्सलियों के क्षेत्र में इस तरह शव को कंधे में ट्रैक्टर में साइकिल में लाने की गाहे बगाहे घटना सामने आती है। विडंबना यह है कि रायगढ़ जैसे औद्योगिक शहर में वह भी शहर के अंदर लाश परिवहन ट्रैक्टर में किया जा रहा है। देखा जाए तो शहर की अगर यह स्थिति है तो धरमजयगढ़ कापू, छाल लैलूंगा जैसे सुदुरवर्ती इलाके की परिकल्पना भयावह स्थिति को दर्शा रहा है।
शासन के निशुल्क शव परिवहन सुविधा का बंटाधार
सरकार द्वारा मृतकों के शव की अस्पताल लाने तथा ले जाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। एंबुलेंस 1099 के माध्यय से निशुल्क शव परिवहन सुविधा दे रही है। इसके तहत शहर में 06 एम्बुलेंस है। इस तरह ट्रेक्टर में शव लाने की घटना पर मृतकों के स्वजनो ने बताया कि पुलिस के पास वे डरकर एम्बुलेंस से सम्बंधित किसी भी बात के लिए चर्चा नही किए।

