डिजिटल भुगतान उपकरण: डिजिटल इंडिया के तहत पैसे का भुगतान अब ऑनलाइन शुरू हो गया है। इसके लिए क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, यूपीएआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस), मोबाइल वॉलेट, एनईएफटी (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर), आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट), आईएमपीएस इमीडिएट पेमेंट सर्विस जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक तरीके हैं। डिजिटली पेमेंट ने पैसों के लेन-देन को काफी आसान बना दिया है।
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भारत में यूपीआई पैसों के लेन-देन के लिए एक बेहद आकर्षक विकल्प तलाशा जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये समुद्रतट में भी चौबीस घंटे काम करता है। Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे UPI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कुछ ही सेकंड में किया जा सकता है। इसकी एक और विशेषता ये है कि इसमें ज्यादातर भुगतान पर कोई शुल्क भी नहीं लगता है। ऐसे में घर का किरायेदार हो या मोटरसाइकिल का सामान लिया जाता हो यूपीआई से झटपट पैमाइंड हो जाता है।
क्रेडिट लाइन
शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने छोटे वित्त बैंकों (लघु वित्त बैंक) को यूपीआई के माध्यम से लोन की छूट दे दी। इसके लिए जल्द ही जारी हो जाएंगे। इससे संबंधित सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में भी छोटे-छोटे गोदामों को आसानी से लोन उपलब्ध कराया जा सकेगा, जिससे आर्थिक उपकरण बेचे जाएंगे, रोजानगर के जंगलों और ग्रामीण इलाकों का अधिक विकास होगा। पहले यूपीआई पर लोन की मंजूरी कुछ ही वाणिज्यिक बैंकों को थी।
एनईएफटी
भारत में आरबीआई द्वारा संचालित इस इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली से घरेलू स्तर पर बैंकों के खातों के बीच डेटा ट्रांसफर बेहद आसानी से हो जाता है। हालाँकि, इस तरह से आप एक निश्चित समय के भीतर ही दवाओं का लेन-देन कर सकते हैं।
UPI के सिस्टम का पैमाना होना कुछ समय लगता है। हालाँकि, NEFT दस्तावेज़ और सुरक्षा की दृष्टि से काफी सार्थक है। इसके लिए UPI जैसे कीटेक की भी जरूरत नहीं है, बल्कि आप इंटरनेट इंटरनेट या किसी भी बैंक शाखा में जाकर NEFT करा सकते हैं। यह डॉक्टरी लेन-डेन का एक पुराना तरीका है। प्रौद्योगिकी की सटीक समझ न होने के कारण यह विधि सर्वोत्तम है।
आरटीजीएस
मनी ट्रांसफर करने की इस तकनीक में एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में पैसा भेजा जाता है। हालाँकि, इसके जरिए ट्रांसपोर्ट के लिए फ़ीस ली जाती है। आरटीजीएस से पैसा आना ही शुरू हो जाता है, जिससे खातेदार को तुरंत पैसा मिल जाता है।





