कॉर्पोरेट नौकरियाँ: कॉर्पोरेट नौकरियाँ क्यों फैली हुई हैं काल्पनिक साझीदार माया काज़ल, क्या होता है फ़ायदा
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<पी शैली="पाठ-संरेखण: औचित्य सिद्ध करें;"कॉर्पोरेट नौकरियाँ: अगर किसी आईटी में एक साथ सीईओ, बिजनेस और सीएफओ की कई प्रतिष्ठित कंपनियों की वैकेंसी के लिए विज्ञापन आएं तो क्या सोचेंगे आप? अगर पैकेज भी सामान्य से कुछ ज्यादा ही देने का वादा हो तो तब आप निश्चित हो जाएंगे कि यह कंपनी अपने बिजनेस का बड़े पैमाने पर विस्तार करने जा रही है। हो सकता है कि किसी भी नए बिजनेस के लिए कई कंपनी लॉन्च जारी कर रही हों। यह भी तय है कि मौजूदा बिजनेस में भी कंपनी को तगड़ा झटका लग रहा है।
ऐसे ही करियर के शिखर पर चढ़े दिग्गज भी समझेंगे और ट्रेनी से लेकर मिड बिजनेस जॉब के वसीयत वाले युवा कंपनी में नौकरी पाने की कतार में अपना बायोडाटा लगा दिया। नौकरी के अधूरे दिनों से लेकर अब तक एक के बाद एक लागू होने की इच्छा पूरी हो गई है। लेकिन ऑफर के लिए कभी बुलावा नहीं आएगा. अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो आप समझ जाइए कि आप जरूर किसी स्टोर कंपनी के काल्पनिक शैतान के छलावे में आ गए हैं।
कंपनियां क्यों करती हैं इस तरह का धोखा
इस तरह के मामलों में ज्यादातर देखा जाता है कि समय-सीमा के लिए लंबे समय तक के लिए आवेदन करना पड़ता है। यह दो-तीन महीने से लेकर छह महीने तक के लिए होता है। असल में ये उन पार्टनर के लिए होता है, जो या तो कंपनी के पास ही नहीं होते या फिर पहले ही भारी पड़ जाते हैं।
दरअसल बिल्डर्स अपने प्रॉसेस के चलवे में नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को फ़ॉक्सकर रखने के लिए ऐसा करते हैं। इससे संबंधित को शेयर बाजार से लेकर अन्य कश्मीरी मामलों तक में काफी मुनाफा होता है। ऐसा भी होता है कि कंपनी में भविष्य में होने वाली वैकेंसी के लिए भी अच्छी प्रतिभाओं को अलग-अलग कंपनियों के कंसोएटों में जमा कर रखा जाता है, ताकि कोई भी पद खाली होने पर जल्दी से जल्दी पूरा हो सके। ऐसे मामलों में बड़े पैमाने पर उद्यमियों को लाभ होता है, जो कि व्यवसाय के रास्ते पर आगे बढ़ते रहते हैं और युवा घाटे में रहते हैं।
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