Gwalior Well being Information: जेएएच में रेफर का खेल रोकने, आडिट का सहारा
Gwalior Well being Information: जयारोग्य अस्पताल में बिना वजह रेफर किए जाने वाले मरीजों को रोकने के लिए अब आडिट का सहारा लिया जाएगा। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के रेफरल केस रोकना चुनौती होगी।
By anil tomar
Publish Date: Fri, 09 Feb 2024 11:26 AM (IST)
Up to date Date: Fri, 09 Feb 2024 11:26 AM (IST)

HighLights
- सीएचसी, पीएचसी, सिविल और जिला अस्पताल के केसों को रोकना होगी चुनौती
- बिना उपचार के ही सीधे 108 की साहयता से साधारण मरीजों को भी जेएएच भेज दिया जाता है
Gwalior Well being Information: ग्वालियर नई दुनिया प्रतिनिधि। जयारोग्य अस्पताल में बिना वजह रेफर किए जाने वाले मरीजों को रोकने के लिए अब आडिट का सहारा लिया जाएगा। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के रेफरल केस रोकना चुनौती होगी। क्योंकि ये अस्पताल ही सबसे ज्यादा मरीजों को रेफर कर रहे हैं। यहां तैनात सरकारी डाक्टर मरीजों को जेएएच भेजने के लिए सरकारी मशीनरी का ही फायदा उठा रहे हैं। बिना उपचार के ही सीधे 108 की साहयता से साधारण मरीजों को भी जेएएच भेज दिया जाता है। जेएएच में रोजाना ऐसे दर्जनों मरीज पहुंचते हैं जिनका उपचार सीएचसी और पीएचसी में शुरू भी नहीं किया जाता और सीधे मेडिकल कालेज रेफर कर दिया जाता है। इसके चलते यहां पहुंचते तक मरीज की हालत गंभीर हो जाती है और डाक्टरों को दोबारा ट्रीटमेंट शुरू करना पड़ता है।
यह हाल सिर्फ जिले के पीएचसी-सीएचसी का नहीं है बल्कि कई जिला चिकित्सालयों में बैठे डाक्टर भी यही काम कर रहे हैं। मरीज के अस्पताल पहुचंने पर डाक्टर न तो उससे बीमारी की हिस्ट्री पूछते हैं और न ही उसका ट्रीटमेंट करते हैं। इतना ही नहीं जयारोग्य अस्पताल में दतिया, शिवपुरी, भिण्ड, श्योपुर, गुना, मुरैना, छतरपुर, उत्तरप्रदेश, राजस्थान सहित अन्य जिलों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इससे जेएएच में मरीजों का लोड बढ़ जाता है। इससे जेएएच में पलंग तक कम पड़ जाते हैं। सामान्य परिषद की बैठक में जब यह मामला उठा तो उपमुख्यमंत्री ने रेफर केस का आडिट कराने के निर्देश दिए।
आडिट के लिए बनेगी टीम, बरती जाएगी सख्ती
मरीजों को इलाज देने की जगह जेएएच रेफर करने पर सख्ती बरतने का प्लान तैयार किया जाएगा। इसके लिए डाक्टरों की एक टीम बनेगी जो दूसरे अस्पताल से आने वाले मरीजों का आडिट करेगी। आडिट टीम मरीजों को रेफर करने का कारण और पूरा ब्योरा जानेगी। इसके बाद वाजिब कारण न होने पर रेफर करने वाले डाक्टरों से सवाल जवाब किए जाएंगे। जहां से मरीज रेफर किया जाएगा वहां के डाक्टर को लिखना होगा कि मरीज उनके पास कितने बजे आया, उसे क्या समस्या थी, क्या ट्रीटमेंट दिया और नहीं दिया तो इसकी वजह क्या थी। यह भी बताना होगा कि किस सुविधा के कमी के कारण मरीज का इलाज नहीं कर सकते और रेफर कर रहे हैं।
सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल जेडी परखेंगे व्यवस्था
सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल से मरीजों को रेफर किए जाने का मामला उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के सामने जीआरएमसी की सामान्य परिषद की बैठक में उठने के बाद क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डा. राकेश चतुर्वेदी रेफर केस रोकने लिए पहले सीएचसी, पीएचसी, सिविल अस्पताल और जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं परखेंगे। उनका कहना है कि अगर इस दौरान सामने आता है कि बिना वजह मरीजों को रेफर किया जा रहा है तो इस पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा और रेफर करने की प्रक्रिया को रोका जाएगा।
ये मिली मिल रही शिकायतें
- जुकाम, बुखार और मामूली बीमारी के मरीजों को भी रेफर कर दिया जाता है और इन्हें इलाज के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है।
- रात में भर्ती करने से बचने के लिए ज्यादातर मरीज रेफर कर दिए जाते हैं। मरीजों को भटकना पड़ता है और वे थक-हारकर प्राइवेट अस्पताल चले जाते हैं।
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ये होंगे फायदे
- – जेएएच का बोझ कम होगा।
- – मरीजों को जल्दी और सही इलाज मिल सकेगा।
- – पीएचसी और सीएचसी पर न पहुंचने वाले डाक्टरों को मौजूद रहना पड़ेगा।
रेफर आडिट से यह तय हो सकेगा कि जो मरीज रेफर होकर अस्पताल आया है उसे वाकई में यहां भेजा जाना चाहिए था या नहीं। जेएएच आने वाले मरीजों का आडिट करने के लिए चिकित्सकों को जिम्मेदारी दी जाएगी। रेफर आडिट शुरू करने का कदम अच्छा है।
डा.आरकेएस धाकड़, अधीक्षक, जेएएच
अस्पतालों का रिव्यू करेंगे
रेफर केस की शिकायत सामने आई हैं। पहले अस्पतालों का रिव्यू करेंगे। इसमें देखा जाएगा कि मरीजों को रेफर करने के पीछे की वजह क्या है। अगर कोई सेंटर बिना वजह रेफर कर रहे हैं तो उस पर तत्काल रोक लगाई जाएगी।
डा. राकेश चतुर्वेदी, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, ग्वालियर


