यहां सुरक्षा प्रतिष्ठानों को रचित किया जाता है तो कैमरे भी लगाए जाते हैं

यहां सुरक्षा प्रतिष्ठानों को रचित किया जाता है तो कैमरे भी लगाए जाते हैं

जेब्रा क्रॉसिंग आधी बनी हुई

एसोसिएशन पर जेबरा क्रॉजिंग के ढ़लान का पालन न होने के कारण पैदल यात्रियों को अपनी जान जोखिम में डालते हुए डोमेन रोड पार करना पड़ रहा है। शहर के कई प्रमुख-चौराहे जैसे नेहरू चौक, महामाया चौक, रेजिडेंट नगर चौक और अग्रसेन चौक पर जेब्रा क्रॉसिंग की हालत खस्ताहाल है। कई जगहों पर जेबरा क्रॉसिंग आधी बनी हुई है, तो कहीं पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं।

पैदल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाई गई ये पट्टियाँ अब दिखावे की चीज़ें बनकर रह गई हैं। वाहन चालक सिग्नल रेड पर भी जेबरा क्रशिंग के ऊपर स्तम्भ कर देते हैं, जिससे पैदल यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ जाता है।

सड़क पार दिखाओ हाथ करो

बिलासपुर के हाफ बिश्नोई प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पर जेब्रा क्रशिंग की स्थिति साफा दिखती है। नेहरू चौक को ठीक करने के लिए शहर के किसी भी बड़े पोस्टर का सही तरीके से उपयोग नहीं किया जा रहा है। महामाया चौक, राजेंद्र नगर चौक और जरहाभाठा चौक जैसे इलाके में या तो ये गुमशुदा होले हैं पुरानी सीमेंट दुकानों के पास के ज़ेबरा क्रॉसिंग की स्थिति बेहद खराब है।

सरकंडा क्षेत्र में ज़ेबरा क्रॉचिंग स्पष्ट हैं लेकिन वहां रियम लाइट नहीं है। पैदल यात्रियों को अपनी जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने के लिए मजबूर किया जाता है। जेबरा क्रशिंग के विध्वंस का पालन न होने के कारण लोग भागते थे या हाथ में हाथ डालकर सड़क पार करते हैं।

ट्रैफिक पुलिस की खबर

टैचलान कटर और इलेक्ट्रानिक का पेस्ट से पालन करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत अलग है। चैंबर पुलिस द्वारा जेब्रा क्रशिंग पर हो रहे उल्लंघनों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वाहन चालक रेड सिग्नल के बावजूद जेबरा क्रशिंग पार कर लेते हो जाते हैं या ज़ेबरा क्रूज़िंग पर ही हो जाते हैं।

जेबरा क्रशिंग की शिक्षा लेकिन आलमाम कहाँ?

स्कूल में बच्चों को जेबरा क्रशिंग का महत्व बताया जाता है। इसमें बताया गया है कि सड़क पार करना सबसे सुरक्षित तरीका है। लेकिन जब शहर के प्रमुख प्रतिष्ठानों पर इसका पालन नहीं होता है, तो यह शिक्षा व्यर्थ हो जाती है।

ट्रैफिक पुलिस को इस दिशा में सिलेक्टर इंजीनियर होंगे। साथ ही सहयोगी पर जेब्रा क्रॉचिंग को पुनर्जीवित करने और इसे सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाना होगा।

काली और सफेद लाइन ही क्यों?

धातुओं पर बनी जाने वाली जेबरा क्रशिंग काले और सफेद रंग की स्ट्रैटेज से बनी हैं। काली सड़कों पर सफेद रंग की धारियाँ आसानी से दिखाई देती हैं, जिससे पैदल यात्रियों को सड़क पार करने में समय लगता है। इस डिज़ाइन को पहले रंगीन बनाने पर कई बार विचार किया गया था, लेकिन सफेद धारियाँ सबसे प्रभावशाली साबित हुईं।

कई देशों में इसके डिज़ाइन और रंगों में बदलाव किया गया है, लेकिन भारत में पारंपरिक काली और सफेद धारियाँ ही प्रचलित हैं। इन स्ट्राट का उपयोग केवल दृश्यता के लिए ही नहीं, बल्कि यातायात नियंत्रण के लिए भी किया जाता है। वाहन चालकों के लिए यह संकेत है कि उन्हें सड़क पार करने का सुरक्षित स्थान है और पैदल यात्रियों के लिए यह संकेत है कि उन्हें सड़क पार करने का सुरक्षित स्थान है।

स्थानीय संस्करण 1

मैंने शहर में आज तक सड़क पार करने के लिए ज़ेबरा क्रॉसिंग का उपयोग नहीं किया है। ऐसा नहीं है कि मैं ऐसा नहीं करना चाहता, ऐसा इसलिए है क्योंकि ज़ेबरा क्रिमिंग दिखाई ही नहीं देती।

ज़ायोनी, कृष्णा विहार कॉलोनी निवासी

स्थानीय संस्करण 2

ज़ेबरा क्रशिंग के बारे में स्कूल के दौरान ही पढ़ा था, लेकिन आज तक इसका अपने समर्थकों के जीवन में उपयोग नहीं किया जा सका। लोग अपनी गाड़ी ही ज़ेबरा क्रूज़िंग पर स्टेक कर देते हैं।

अंकित साहूकार, कर्मा नगर निवासी

संस्करण अधिकारी

जूतों के दिनों में ज़ेबरा क्रशिंग कूड़ेदान होते हैं। नई वर्कशॉप विज्ञप्ति जारी की जा रही है। दो हफ्ते के अंदर सब फिर से ठीक कर लेंगे।