हैरत है! जिला अस्पताल में प्रसूता की मौत पता ही नहीं किसने किया था आपरेशन

18 नंवबर को मुरार अस्‍पताल की मेटरनिटी में आपरेशन के बाद एक महिला की मौत हो गई थी। इस मामले में ऑपरेशन करने वाले डाक्‍टर को लेकर गफलत हो रही है। अस्‍पताल प्रबंधन को ही नहीं पता किस डाक्‍टर ने ऑपरेशन किया।

By Anoop Bhargav

Publish Date: Sat, 23 Nov 2024 11:49:51 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 23 Nov 2024 11:49:51 AM (IST)

प्रीती जिसकी ऑपरेशन के बाद हुई मौत

HighLights

  1. कलेक्टर ने एसडीएम को दिया जांच का जिम्मा
  2. कमेटी में दाे डाक्टर भी किए गए हैं शामिल
  3. 18 नवंबर को हुई थी ऑपरेशन के बाद महिला की मौत

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: जिला अस्पताल मुरार के प्रसूति गृह में 18 नवंबर को प्रसूता प्रीति गोयल का आपरेशन किसने किया, यह बात पूरा जिला अस्पताल प्रबंधन छिपाने पर तुला हुआ है। इस बात से साफ जाहिर है कि महिला की मौत के मामले में लापरवाही तो हुई है। हैरानी की बात है कि महिला की मौत होने का इतना बड़ा घटनाक्रम हो गया और सीएमएचओ से लेकर आरएमओ तक को नहीं पता है कि यह आपरेशन किस महिला डाक्टर ने किया।

इतने महत्वपूर्ण सरकारी अस्पताल में मरीजों के इलाज के नाम पर इतनी बेपरवाही पहली बार सामने आई है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद एसडीएम मुरार अशोक चौहान को जांच का जिम्मा सौंपा है। इसमें दो महिला चिकित्सकों को भी शामिल किया गया है। वहीं मेटरनिटी की प्रभारी डा. शालिनी शर्मा के अनुसार 18 नवंबर को मेटरनिटी वार्ड में डा गीता अहिरवार की डयूटी थी।

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इससे साफ है कि आन रिकार्ड डा गीता ने ही यह आपरेशन किया है। नईदुनिया ने इस मामले में जब डा. गीता से बात की तो उन्होंने साफ कहा कि मैं इस मामले में कोई जवाब नहीं दे पाऊंगी। शिकायतकर्ता विष्णु गोयल के अनुसार 18 नवंबर को पत्नी प्रीति गोयल का आपरेशन हुआ और उसने बच्ची को जन्म दिया। प्रीति के पैरों में सूजन थी, वह हाई बीपी से ग्रसित थी।

इस स्थिति में केस को तत्काल कमलाराजा अस्पताल के लिए रेफर करना था, लेकिन चिकित्सकों ने ऐसा नहीं किया। प्रसव के दूसरे दिन प्रीति की तबीयत बिगड़ गई। बीपी 210 तक पहुंच गया। प्रीति को निजी नर्सिंग होम में भर्ती करने के कहा गया, लेकिन मौके पर मौजूद डाक्टरों ने सरीज को ले जाने से मना कर दिया। प्रीति की तबीयत खराब होने पर स्वजन को उसके पास भी नहीं जाने दिया गया। 19 नवंबर की दोपहर 12 बजे तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। फिर भी मरीज को दोपहर 2 बजे कमलाराजा असपताल के लिए रेफर किया गया। हम प्रीति को लेकर कमलाराजा अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां डाक्टरों ने प्रीति को मृत घोषित कर दिया।

बड़ा सवाल: केस क्रिटिकल था तो रेफर क्यों नहीं किया

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह कि मरीज के बारे में पहले से ही डाक्टरों को पता था, लेकिन उसे केआरएच के लिए रेफर नहीं किया गया। यह केस पहले से डा रजनी जैन देख रही थीं, लेकिन वह 11 नवंबर से अवकाश पर हैं। जांच कमेटी ने भी अपनी जांच में यह प्रमुखता से लिया है कि मरीज को रेफर क्यों नहीं किया गया।

मौत को लेकर इस तरह पूरा प्रबंधन चुप्पी साध रहा

सीएमएचओ डा. सचिन श्रीवास्तव: इस मामले में कमेटी जांच कर रही है। किस डाक्टर ने महिला का आपरेशन किया, यह पता नहीं है। कमेटी की जांच में ही यह सामने आएगा। द्य डा. रजनी जैन: मैं 11 नवंबर से लीव पर हूं, इसलिए मुझे इस मामले में जानकारी नहीं है। द्य आरएमओ डा. आलोक पुरोहित: इस मामले में अब जांच कमेटी गठित हो गई है। जांच में स्पष्ट होगा कि किसने आपरेशन किया था और क्या गडबड़ हुई।

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डा. गरिमा यादव ने कहा- मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया

इस मामले में प्रसूति गृह की डा. गरिमा यादव ने बताया कि शिकायती पत्र में उनका नाम गलत प्रस्तुत किया गया है, उनका इस आपरेशन से कोई लेना देना नहीं है। षड्यंत्र पूर्वक उनका नाम इस मामले में प्रसारित किया जा रहा है। बता दें कि इस मामले में शिकायतकर्ता विष्णु गोयल की ओर से कलेक्टर को दिए गए शिकायती पत्र में डा. गरिमा यादव का नाम लिखा गया कि उन्होंने आपरेशन किया। मेटरनिटी प्रभारी ने भी यह स्पष्ट किया कि उस दिन डा. गीता की डयूटी थी।

मेटरनिटी प्रभारी ने बताया- डा. गीता अहिरवार की थी डयूटी

इस मामले में नईदुनिया ने प्रसूति गृह की मेटरनिटी वार्ड प्रभारी डा शालिनी शर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि अस्पताल में डयूटी का चार्ट रहता है। जिस दिन महिला का आपरेशन हुआ, उस दिन डा गीता अहिरवार की डयूटी थी। डा रजनी जैन 11 नवंबर से लीव पर हैं। एक डा शिवहरे हैं, जो डेढ़ साल से नहीं आ रहीं हैं। उन्होंने वीआरएस के लिए आवेदन दिया है।

जिला कलेक्टर से इस मामले में जांच के निर्देश मिले हैं। दो महिला डाक्टरों को जांच टीम में शामिल किया गया है। डाक्टरों की ड्यूटी जांच कर बयान लिए जाएंगे। आसपास के मरीजों से भी पूछताछ की जाएगी। मरीज क्रिटिकल था तो रेफर क्यों नहीं किया गया और क्या लापरवाही रही, पूरी जांच होगी।

-अशोक सिंह चौहान, एसडीएम, मुरार