धान खरीदी में सख्ती से अधिया व्यवस्था में खेती करने वाले किसानों पर संकट

इस साल सरकार ने किसानों को राहत देते हुए प्रति एकड़ धान खरीदी की सीमा 15 से बढ़ाकर 21 क्विंटल कर दी है। समर्थन मूल्य भी 2500 रुपये से बढ़ाकर 3100 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। यह कदम किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है।

By Yogeshwar Sharma

Publish Date: Sat, 23 Nov 2024 12:46:02 AM (IST)

Up to date Date: Sat, 23 Nov 2024 12:47:16 AM (IST)

श्रमिक किसानों के सामने कई तरह की दिक्कतें खड़ी होने लगी है।

HighLights

  1. धान रखने का हिसाब देना जरूरी, वरना अवैध मानकर जब्त कर लिया जाएगा धान
  2. धान खरीदी शुरू होते ही खाद्य विभाग का शिकंजा
  3. किसानों के सामने व्यवहारिक परेशानियां

नईदुनिया न्यूज, बिलासपुर। राज्य में धान खरीदी का सीजन शुरू होते ही सरकार ने बिचौलियों और अवैध व्यापारियों पर शिकंजा कसने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। खाद्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर धान के भंडारण और व्यापार की जांच कर रही हैं। हालांकि, इस सख्ती ने उन किसानों और ग्रामीणों के लिए व्यवहारिक कठिनाइयां खड़ी कर दी हैं, जो अधिया या श्रमिक व्यवस्था के तहत खेती करते हैं। किसानों को अपने पास रखे धान का रकबा अनुसार ब्यौरा देना अनिवार्य कर दिया गया है। जो ऐसा नहीं कर पाएंगे, उनके धान को अवैध मानते हुए जब्त किया जाएगा। ऐसे में अधिया में खेती करने वाले श्रमिक किसानों के सामने कई तरह की दिक्कतें खड़ी होने लगी है।

इस साल सरकार ने किसानों को राहत देते हुए प्रति एकड़ धान खरीदी की सीमा 15 से बढ़ाकर 21 क्विंटल कर दी है। समर्थन मूल्य भी 2500 रुपये से बढ़ाकर 3100 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। यह कदम किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। लेकिन, अवैध व्यापार को रोकने के लिए खाद्य विभाग की सख्ती ने ग्रामीण इलाकों में समस्याएं पैदा कर दी हैं।

अब अधिया किसान कैसे देंगे ब्यौरा

ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में किसान अधिया या श्रमिक व्यवस्था के तहत खेती करते हैं। इन किसानों के पास खुद की जमीन नहीं होती और वे जमीन मालिक के साथ साझा उत्पादन पर आधारित समझौता करते हैं। विभाग की सख्ती के चलते इन किसानों को अपने पास रखे धान का ब्यौरा देना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि, अधिया व्यवस्था में खेती करने वाले किसानों के पास ऐसा कोई स्पष्ट दस्तावेज नहीं होता जो यह साबित कर सके कि उनके पास रखा धान वैध है। इसका नतीजा यह है कि उनके धान को भी अवैध घोषित कर जब्त किया जा सकता है।

ग्रामीण व्यापारियों पर भी कार्रवाई

बेलतरा और सलका जैसे क्षेत्रों में खाद्य विभाग ने किराना दुकानदारों और व्यापारियों से 125 कट्टे धान जब्त किए हैं। यह धान ग्रामीणों द्वारा विनिमय व्यवस्था के तहत सामान के बदले दिया गया था। अब इन व्यापारियों के पास रखा धान भी अवैध घोषित किया जा रहा है, जिससे उनके व्यापार संचालन पर प्रभाव पड़ा है।

व्यवहारिक समस्याओं को नजरअंदाज करना बड़ी चुनौती

अधिया किसानों और ग्रामीण व्यापारियों के सामने आई इन समस्याओं ने प्रशासन के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक व्यवस्था के चलते श्रमिक और छोटे किसान अक्सर जमीन मालिकों पर निर्भर होते हैं। विभाग की ओर से इन किसानों के लिए कोई विशेष नीति न होने के कारण वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

सख्ती के साथ समाधान भी जरूरी

ग्रामीणों की माने तो सरकार का उद्देश्य बिचौलियों पर रोक लगाना है, जो सराहनीय है। लेकिन व्यवहारिक समस्याओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं। अधिया व्यवस्था में खेती करने वाले किसानों और ग्रामीण व्यापारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और समाधान जरूरी हैं, ताकि वे सख्ती के नाम पर हो रही कार्रवाई के शिकार न बनें।

बिचौलियों पर नकेल कसने के लिए कड़ी निगरानी

राज्य में धान खरीदी का सीजन शुरू होते ही खाद्य विभाग ने धान के अवैध व्यापारियों और बिचौलियों पर शिकंजा कसने के लिए अभियान तेज कर दिया है। समर्थन मूल्य की आड़ में हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए गांव-गांव जांच अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, इस सख्ती ने ग्रामीणों के लिए व्यवहारिक समस्याएं भी पैदा कर दी हैं। बिचौलियों और धान व्यापारियों द्वारा अवैध रूप से धान खपाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। इसे रोकने के लिए खाद्य विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं और गांव-गांव निरीक्षण कर रही हैं। बेलतरा और सलका जैसे क्षेत्रों में किराना दुकानदारों और व्यापारियों के पास से 125 कट्टे अवैध धान जब्त किए गए हैं। मंडी अधिनियम के तहत इन व्यापारियों पर कार्रवाई भी की गई है।

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बैंक अधिकारी से किया दुर्व्यवहार, जान से मारने की दी धमकी

दयालबंद स्थित बैंक आफ इंडिया में व्यवसायी ने स्टाफ से दुर्व्यवहार किया। साथ ही अधिकारी को जान से मारने की धमकी दी। बैंक मैनेजर ने इसकी शिकायत कोतवाली थाने में की है। इस पर पुलिस ने व्यवसायी के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में जुर्म दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

दयालबंद स्थित बैंक आफ इंडिया के मैनेजर संजीव पटेल ने व्यवसायी के खिलाफ जान से मारने की धमकी और सरकारी काम में बाधा उत्पन्न करने की शिकायत की है। मैनेजर ने बताया कि व्यवसायी राजेश लालचंदानी का खाता है। बुधवार 20 नवंबर की दोपहर एक बजे के आसपास राजेश लालचंदानी का प्रतिनिधि बैंक आया। उसने 90 हजार का चेक देकर कैश मांगा। कैश काउंटर पर बैठे अधिकारी ने बताया कि कैश क्रेडिट खाता होने के कारण इसके लिए अधिकारी की अनुमति की जरूरत होने की बात कही। इस पर व्यवसायी का प्रतिनिधि बैंक के अधिकारी सुशांत मिश्रा के पास गया। बैंक अधिकारी ने बताया कि खाता धारक ने कई महीनों से स्टाक स्टेटमेंट जमा नहीं किया है। इसके कारण बैंक की ओर से नगद आहरण की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस पर प्रतिनिधि ने अपने मोबाइल से बैंक अधिकारी की बात राजेश से कराई। उसने बैंक के अधिकारी से अभद्र व्यवहार किया। इसके बाद राजेश ने बैंक के मैनेजर को काल कर जान से मारने की धमकी दी। साथ ही गाली-गलौज की। बैंक मैनेजर की शिकायत पर पुलिस ने जुर्म दर्ज कर मामले को जांच में लिया है।