Tansen Celebration 2024: तबला वादक पंडित स्वपन चौधरी को मिलेगा शताब्दी समारोह में तानसेन अलंकरण

ग्वालियर के मोहम्मद गौस का मकबरा स्थित तानसेन की स्थल पर 14 दिसंबर से शुरू होने वाले इस आयोजन में 2023 का तानसेन रत्न अलंकरण प्रख्यात तबला वादक पद्मश्री स्वपन चौधरी को मुख्य समारोह के उद्घाटन अवसर पर प्रदान किया जाएगा। देश में चार स्थानों पर संगीत के 14 नवंबर से आयोजन होंगे। पहला कार्यक्रम जयपुर के जवाहर कला केंद्र में होगा।

By Mahesh Gupta

Publish Date: Fri, 22 Nov 2024 01:56:14 PM (IST)

Up to date Date: Fri, 22 Nov 2024 01:56:14 PM (IST)

प्रख्‍यात तबला बादक पद्मश्री स्वपन चौधरी

HighLights

  1. साल 2023 के लिए स्वपन चौधरी को मिलेगा राजा मान सिंह तोमर अलंकरण
  2. शताब्दी समारोह के तहत 24 नवंबर से देश में चार स्थानों पर शुरू होंगी संगीत सभाएं
  3. तानसेन रत्न अलंकरण मुख्य समारोह के उद्घाटन अवसर पर प्रदान किया जाएगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तानसेन समारोह इस साल अपना शताब्दी समारोह मनाने का जा रहा है। ग्वालियर के मोहम्मद गौस का मकबरा स्थित तानसेन की स्थल पर 14 दिसंबर से शुरू होने वाले इस आयोजन में 2023 का तानसेन रत्न अलंकरण प्रख्यात तबला वादक पद्मश्री स्वपन चौधरी को मुख्य समारोह के उद्घाटन अवसर पर प्रदान किया जाएगा। इसी कार्यक्रम में दिया जाने वाला राज मानसिंह तोमर अलंकरण इंदौर की सानंद संस्था को मिलेगा।

आयोजन से पहले देश में चार स्थानों पर संगीत के 14 नवंबर से आयोजन होंगे। पहला कार्यक्रम जयपुर के जवाहर कला केंद्र में होगा। इसमें भोपाल के वायलिन वादक पंडित प्रवीण शेवलीकर, चेताली शेवलीकर, तबला वादक डा. प्रवीण उद्भव और श्रृतु उद्भव उज्जैन प्रस्तुति देंगे। इनके अलावा मुंबई की गौरी पाठारे का गायन होगा। इसके अलावा वडोदरा गुजरात, खैरागढ़ छत्तीसगढ़, वाराणसी में संगीत सभाएं होंगी। तानसेन शताब्दी समारोह के लिए मप्र के संस्कृति विभाग ने विशेष तैयारियां की हैं।

naidunia_image

आयोजन के प्रचार-प्रसार के लिए प्रोमो, लोगो और वेबसाइट लांच की जाएगी। ध्रुपद की वर्तमान स्थिति, विस्तार और व्यापकता पर आधारित सेमिनार 16 से 18 दिसंबर तक चलेगा। इसमें 100 स्कालर शामिल होंगे, इसके अलावा 15 से 17 दिसंबर तक गुरु शिष्य परंपरा, ध्रुपद, खयाल, टप्पा, दादरा और घरानों आदि पर चर्चा एवं संवाद होगा। हजीरा स्थित परिसर में दुर्लभ वाद्य यंत्रों का प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शनी में संगीत प्रेमी लोक एवं शास्त्रीय संगीत के 550 दुर्लभ वाद्य यंत्रों को देख सकेंगे।

उनकी आंखों के सामने चित्र की मदद से समारोह का 100 साल का सफर होगा। इसके लिए क्यूआर कोड की व्यवस्था की जाएगी। जिसे स्कैन कर संगीत प्रेमी मोबाइल में यू-ट्यूब के जरिए 100 साल की प्रस्तुतियों का आनंद ले सकेंगे। 14 से 19 दिसंबर तक चलने वाले समारोह में 150 भारतीय और 10 विदेशी कलाकार गायन-वादन करेंगे।

naidunia_image

लखनऊ घराने से जुड़े हैं स्वपन चौधरी

  • भारत सरकार से प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के साथ-साथ अमेरिकन एकेडमी आफ आर्टिस्ट अवार्ड से सम्मानित कोलकाता के तबला वादक पंडित स्वपन चौधरी का नाता लखनऊ घराने से है। हाल ही में उन्हें कोलकाता में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से डाक्टरेट की उपाधि भी मिली है। 2016 में और फिर 2019 में, स्वपन चौधरी को कैलिफोर्निया पारंपरिक कला के लिए मास्टर/अपरेंटिस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • स्वप्न चौधरी ने पांच साल की उम्र में तबला सीखना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपनी शैली को अपने गुरु, कोलकाता के दिवंगत पंडित संतोष कृष्ण विश्वास, जो लखनऊ घराने के एक प्रख्यात कलाकार थे, से प्राप्त गहन प्रशिक्षण पर आधारित किया है। संगीत में शैक्षणिक डिग्री के अलावा, स्वप्नजी ने जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री भी प्राप्त की है।

सुधाकर काले ने 1993 में इंदौर में की सानंद न्यास की स्थापना

मराठी संस्कृति, साहित्य और कला का समर्पित सानंद न्यास को तानसेन शताब्दी समारोह में 2023 के लिए राजा मानसिंह तोमर अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा। पेशे से इंजीनियर सुधाकर काले ने इसकी शुरुआत 1993 में की। अभिनय, नाट्य सहित तमाम तरह की सांस्कृतिक व साहित्यिक गतिविधियों को एक सशक्त मंच प्रदान करने वाली संस्था सानंद न्यास को प्रतिष्ठित बनाने के लिए सुधाकर काले ने नगर के गणमान्य और प्रतिष्ठित लोगों को इससे जोड़ा।

फिर वे मुंबई गए और वहां मराठी नाटकों के वरिष्ठ कलाकारों से अनुरोध किया कि इंदौर आकर प्रस्तुतियां दें। एक नवंबर 1994 के दिन रवीन्द्र नाट्य गृह में प्रथम नाटक का मंचन हुआ। यह इतना सफल रहा कि बिना प्रचार-प्रसार के न्यास के 90 प्रतिशत सदस्यों ने उपस्थिति दर्ज कराई। 13 अप्रैल 2006 को सानंद न्यास ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ को आमंत्रित कर सम्मानित किया। तब संस्था राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई। इस पर शोध के लिए बिरला इंस्टीट्यूट की टीम आई। वर्तमान में यह 4500 सदस्यों के साथ सक्रिय है।