सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश का हवाला देते हुए चेतावनी दी थी कि यदि आदेश का पालन करते हुए काम पर नहीं लौटे तो इस रवैये को अवमानना का श्रेणी में रखकर अवमानना कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। यही नहीं उनका निष्कासन करने का आदेश भी पारित करने से गुरेज नहीं किया जाएगा।
By Surendra Dubey
Publish Date: Fri, 22 Nov 2024 12:28:02 PM (IST)
Up to date Date: Fri, 22 Nov 2024 12:39:21 PM (IST)
HighLights
- अधिवक्ताओं की राज्यव्यापी हड़ताल के बाद अवमानना कार्रवाई का मामला।
- 2023 में एमपी स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर वकील हड़ताल पर गए थे।
- एमपी स्टेट बार काउंसिल के वाइस चेयरमैन बोले- वकीलों के लिए बड़ी राहत।
नईदुनिया, जबलपुर (MP Excessive Courtroom)। हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने एमपी स्टेट बार काउंसिल के चेयरमैन राधेलाल गुप्ता की बेशर्त माफी मंजूर कर ली। इसी के साथ अधिवक्ताओं की राज्यव्यापी हड़ताल के बाद शुरू की गई अवमानना कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
.jpg)
एमपी स्टेट बार काउंसिल के वाइस चेयरमैन ने बड़ी राहत बताया
हाई कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस लेने की जानकारी दी गई, जिसे अभिलेख में लेकर हाई कोर्ट ने मामले का पटाक्षेप कर दिया। एमपी स्टेट बार काउंसिल के वाइस चेयरमैन आरके सिंह सैनी ने इसे प्रदेश के वकीलों के लिए बड़ी राहत बताया है।
.jpg)
2023 में समूचे प्रदेश के वकील हड़ताल पर चले गए थे
दरअसल, मार्च, 2023 में एमपी स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर जबलपुर सहित समूचे प्रदेश के वकील हड़ताल पर चले गए थे। जिसके बाद हाई कोर्ट ने संज्ञान आधारित जनहित याचिका की सुनवाई की व्यवस्था दे दी थी। प्रारंभिक सुनवाई में वकीलों को तत्काल कार्य पर वापस लौटने के निर्देश दिए गए थे।
.jpg)
आदेश की प्रति के साथ नोटिस जारी करने की व्यवस्था दी गई थी
आदेश की प्रति के साथ हाई कोर्ट रजिस्ट्री के जरिए एमपी स्टेट बार के चेयरमैन, हाई कोर्ट बार जबलपुर, इंदौर व ग्वालियर के अध्यक्ष, हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार, जबलपुर के अध्यक्ष के अलावा राज्य के सभी जिला व तहसील बार के अध्यक्षाें को नोटिस जारी करने की व्यवस्था दी गई थी।
प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद हाई कोर्ट को सूचित कर दिया गया
इस मामले की विगत सुनवाई के दौरान स्टेट बार ने भरोसा दिलाया था कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस ले लेंगे। यह प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद हाई कोर्ट को सूचित कर दिया गया। साथ ही स्टेट बार चेयरमैन ने बिना शर्त माफीनाम पेश कर दिया। जिसे रिकार्ड पर लेकर हाई कोर्ट ने प्रदेश के वकीलों को अवमानना कार्रवाई से निजात दे दी।
ईडब्ल्यूएस आरक्षण के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र को चुनौती
वहीं दूसरे मामले में हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को दिए जाने वाले ईडब्ल्यूएस आरक्षण के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र को चुनौती दी गई है।
हाई काेर्ट ने राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने राज्य शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव, शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, तकनीकी शिक्षा विभाग के डायरेक्टर और डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
नौकरी व प्रवेश में 10 प्रतिशत आरक्षण ईडब्ल्यूएस को दिया जाए
जनहित याचिकाकर्ता छिंदवाड़ा निवासी राजेश खिरेकर की ओर से अधिवक्ता विट्ठल राव जुमड़े ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि सामान्य प्रशासन विभाग ने दो जुलाई, 2019 को परिपत्र जारी कर प्रदेश के सभी विभागों को आदेश दिए थे कि नौकरी व प्रवेश में 10 प्रतिशत आरक्षण ईडब्ल्यूएस को दिया जाए।
ईडब्ल्यूएस का 10 प्रतिशत आरक्षण केवल अनारक्षित वर्ग सीटों में से ही दिया जाए
प्रदेश सरकार द्वारा 2019 से कुल उपलब्ध पदों में से 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस को दिया जा रहा है। ऐसा करना संविधान के 103वें संशोधन के विपरीत है। हाई कोर्ट की एक एकलपीठ ने पिछले दिनों एक मामले में यह स्पष्ट किया था कि ईडब्ल्यूएस का 10 प्रतिशत आरक्षण केवल अनारक्षित वर्ग सीटों में से ही दिया जाए।
परिपत्र को निरस्त कर नए सिरे से स्पष्ट प्रविधान के साथ पुन: जारी किया जाए
हाई कोर्ट को अवगत कराया गया कि वर्ष 2023 में एमबीबीएस में प्रवेश के लिए कुल उपलब्ध सीटों में से 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस को दिया गया है। जनहित याचिका में मांग की गई कि विभाग के उक्त परिपत्र को निरस्त कर नए सिरे से स्पष्ट प्रविधान के साथ पुन: जारी किया जाए।



.jpg)

