सीजी धन खरीदडी: छत्तीसगढ़ में धान की लोकप्रियता, टोकन नहीं कटने से केंद्र से मोह लौट रहे किसान

सीजी धन खरीदडी: छत्तीसगढ़ में धान की लोकप्रियता, टोकन नहीं कटने से केंद्र से मोह लौट रहे किसान

छत्तीसगढ़ में धान विवाद एक सप्ताह से शुरू हो गया है, लेकिन किसानों की समस्या पर प्लांटेशन की कमी और बारदानों की समस्या है। राइस मिलर्स ने कस्टम मिलिंग बंद कर दी है। अब तक सरकार ने राइस मिलर्स का नामांकन भी नहीं कराया है, जिससे प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

द्वारा पराग मिश्रा

प्रकाशित तिथि: गुरु, 21 नवंबर 2024 08:54:35 अपराह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: गुरु, 21 नवंबर 2024 08:55:05 अपराह्न (IST)

छत्तीसगढ़ में धान का मामला। फ़ाइल फ़ोटो

पर प्रकाश डाला गया

  1. कस्टम मिलिंग नहीं कर रहे राइस मिलर, 60 लाख बारदाने देते हैं असामी व्यापारियों को।
  2. किसानों को निजीकरण और बारदानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
  3. कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर किसानों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाया।

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान की तंगी शुरू हो गई है और लगभग एक सप्ताह हो गया है और विलासिता की समस्याएं भी सामने आ गई हैं। बहुत से संग्रहालयों में किसानों को डिजिटल तकनीक नहीं मिल रही है तो कुछ सोसाइटियां अभी से बारदानों की कमी से शुरू हो गई हैं। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के राइस मिलर्स ने भी अपना सहयोग शुरू कर दिया है और कस्टमाई मिलिंग तक उत्पाद भुगतान नहीं करने का निर्णय लिया है।

जानकारी के अनुसार अभी तक राज्य सरकार भी राइस मिलर्स के लिए पंजीकरण के लिए पहले नहीं कर रही है। धान के बागानों में राइस मिलर्स के पास करीब 60 लाख बारदाने उपलब्ध हैं। इस साल अभी तक राइस मिलर्स का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है।naidunia_image

राइस मिलर्स का कहना है कि आने वाले दिनों में संकट और संकट और सोसाइटियों को बारदानों की कमी से भी जूझना पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को लेकर पत्र भी लिखा है। अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने कहा कि पेट्रोलियम पेमेंट न मिलने के कारण राइस मिलर्स को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

टोकन न मिलने से चिंता हो रही किसान

दुर्ग जिले में प्लांट में समर्थित मूल्य पर धान टोकन लेना किसान परेशान है। ऑफ़लाइन टोकन ऐप रोज़ सुबह 9.30 बजे खुलता है और 10 से 15 मिनट में ही सारे चिप्स के साथ टोकन कट जाता है। इसे बनाने वाले किसानों को मैनुअल तकनीक नहीं मिल रही है। किसानों को मोह वापस लौटना पड़ रहा है। किसानों को पांच दिसंबर तक टोकन दिया जा चुका है।naidunia_image

नहीं मिल रही पाइपलाइन प्रौद्योगिकी

राजनंदगांव जिले के 96 धान अलॉटमेंट में समर्थन मूल्य पर धान प्राप्त हो रही है। अभी तक 10,627 किसान उपज बेच चुके हैं। किसानों को सब्जी बेचने के लिए प्लास्टिक मशीनरी लेनी पड़ रही है। इसके लिए टोकन तुंहर हैण्ड एप बनाया गया है। इसमें पांच दिसंबर तक टोकन रिलीज हो चुकी है। अब वैयक्तिकृत तकनीक नहीं मिल रही है।

धान की गुणवत्ता में निर्भरता

प्रदेश कांग्रेस के महासचिव धनंजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार के किसानों को धान की कीमत 3,100 रुपये प्रति औंस और प्रति लंगर 21 रुपये की कीमत से वंचित रखा गया है। 68,688 किसानों से 3 लाख टन धान की कमाई हुई है। जो भाजपा सरकार के धान मूल में अरुचि को शामिल करता है।

ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में धान की खरीदी के लिए 27 लाख 68,000 किसानों ने पंजीयन कराया है और सरकार का लक्ष्य 160 लाख टन धान की खरीदी का है। तीन दिनों में जिस प्रकार से किसानों को टोकन, बरदाना के लिए भटकाना पड़ रहा है।