गांधी रोड स्कीम की बेशकीमती 27 बीघा जमीन को नेहरू गृह निर्माण समिति द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुर्द-बुर्द करने के मामले में जीडीए के अफसर पडाव थाने में ढाई घंटे बैठे रहे। लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसलिए जीडीए के अफसर एसपी से मिले और उन्हें उससे संबंधित दस्तावेज दिए।
By Priyank Sharma
Publish Date: Thu, 21 Nov 2024 10:56:16 AM (IST)
Up to date Date: Thu, 21 Nov 2024 10:56:16 AM (IST)
HighLights
- 24 बीघा जमीन को नेहरू गृह निर्माण समिति द्वारा फर्जी दस्तावेजों से खुर्द-बुर्द करने का मामला
- नेहरू गृह निर्माण समिति द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुर्द-बुर्द करने एफआइआर दर्ज कराने की कवायद
- पडाव थाना पुलिस ने जीडीए के अफसरों को ढाई घंटे बैठाकर कर दिया वापस, नहीं दर्ज की थी एफआइआर
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की गांधी रोड स्कीम की बेशकीमती 27 बीघा जमीन को नेहरू गृह निर्माण समिति द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुर्द-बुर्द करने के मामले में सोसायटी पदाधिकारियों पर एफआइआर दर्ज कराने की कवायद की जा रही है। गत मंगलवार को जीडीए के सहायक यंत्री गणेश पाटिल को पड़ाव थाना पुलिस ने ढाई घंटा बैठाकर वापस लौटा दिया।
इसके बाद बुधवार को जीडीए सीईओ नरोत्तम भार्गव ने एसपी धर्मवीर सिंह से मुलाकात की। सीईओ ने पुलिस अधीक्षक को नेहरू गृह निर्माण समिति द्वारा किए गए फर्जीवाड़े से संबंधित जांच रिपोर्ट व अन्य साक्ष्य भी उपलब्ध कराए, जिन्हें देखकर पुलिस अधीक्षक ने एफआइआर कराने का आश्वासन दिया। हालांकि अब भी इस मामले में कुछ अन्य दस्तावेजों की मांग की गई है, ताकि ठोस केस बन सके। चूंकि इस फर्जीवाड़े की शुरूआत 53 साल पहले वर्ष 1971 से हुई थी।
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ऐसे में कई बार सोसायटी के पदाधिकारी बदले हैं। इसके अलावा जीडीए के पुराने अधिकारियों की भी इसमें भूमिका होने का संदेह है। इसके चलते पुलिस अधीक्षक ने कुछ अन्य दस्तावेजों की मांग की है, ताकि केस दर्ज होने के बाद जांच में भी सहायता मिल सके। सीईओ नरोत्तम भार्गव के अनुसार इस मामले में जो दस्तावेज मांगे गए हैं, वो जल्द ही उपलब्ध कराए जाएंगे और दोषियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।
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ये है मामला
- वर्ष 1971 में टाउन इंप्रूवमेंट ट्रस्ट (वर्तमान में ग्वालियर विकास प्राधिकरण) के समय किसानों से फर्जी रजिस्ट्री और एग्रीमेंट दर्शाकर नेहरू गृह निर्माण समिति ने गांधी रोड स्कीम की बेशकीमती 27 बीघा जमीन बेच डाली। इसके बावजूद समिति के पदाधिकारी जीडीए के अधिकारियों पर दबाव डालकर और जमीन की मांग करते रहे। लंबी कानूनी लड़ाई चली और 53 साल के बाद सोसायटी का फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया।
- मामले की जांच के बाद प्राधिकरण के सीईओ नरोत्तम भार्गव ने सोसायटी के साथ अनुबंध निरस्त कर पदाधिकारियों पर एफआइआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। सोसायटी ने जिस जमीन को खुर्द-बुर्द किया, उसका अनुमानित बाजार मूल्य 200 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। सोसायटी के अध्यक्ष का नाम तनय श्रीवास्तव बताया गया है। सोसायटी ने इस जमीन की रजिस्ट्री पार्वती बाई और हरीकृष्ण आदि से होना बताया था, जबकि यह जमीन वर्ष 1966 और 1977 में गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से जीडीए को सौंप दी गई थी।



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