मंडियों में सोयाबीन की आवक बढ़ने के बाद भी खाने के तेल के रेट नहीं घट रहे हैं। दीपावली के बाद भी तेल की दरों में कमी नहीं आने से सभी हैरान हैं। ड्राप के अनुसार तेल के रेट कम न होना सबसे बड़ा कारण है। तेल मिलें भी त्रिकोण में चल रही हैं।
द्वारा प्रशांत पांडे
प्रकाशित तिथि: बुध, 20 नवंबर 2024 11:44:52 पूर्वाह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: बुध, 20 नवंबर 2024 11:51:15 पूर्वाह्न (IST)
लोकेश सुपरमार्केट, नईदुनिया, इंदौर(खाद्य तेल दर)। मध्य प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन की आवक बढ़ रही है, लेकिन खाने का तेल सस्ता नहीं हो रहा है। उपभोक्ताओं के लिए तेल महंगा है जबकि हार्ट की बात यह है कि किसानों को सोयाबीन का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। तेल मिलें भी त्रिकोण में चल रही हैं।
तेल के पैकेज की राहत, किसानों की उपज का सही मूल्य और तेल उद्योग के लाभ की उम्मीद में सस्ता हो रही खली ने खल्लाल डाला है। सरकार की कोशिशें भी फेल हो गईं। इससे किसान-उपभोक्ता और उद्योग त्रस्त नजर आ रहे हैं। दीपावली पर्व के बाद भी तेल का सस्ता होना हैरान करने वाला नहीं है।
सोयाबीन तेल के रेट 100 रुपए तक पहुंच गए हैं

12 सितंबर तक इंदौर के थोक बाजार में सोयाबीन तेल के दाम 100 रुपये और मूंगफली तेल के दाम 110 रुपये के आसपास बने हुए थे। इसके बाद सरकार ने तेल के आयात पर शुल्क 20 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। सोयाबीन के सही दाम किसानों को मिल गए पैसों के बारे में जानकारी दी गई। इसका असर यह हुआ कि तेल का दाम बढ़ते-बढ़ते 150 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया।
किसानों के लिए सोयाबीन की फसल अच्छी नहीं है
अनोखी बात यह है कि किसानों के लिए सोयाबीन की फसल नहीं बढ़ी। अब प्रदेशभर की मंडियों में सोयाबीन की आवक बढ़ रही है और दीपावली भी जारी है लेकिन तेल के दाम नहीं घटे। उपभोक्ताओं का तेल अब भी 140 रुपये लीटर मिल रहा है। इंडस्ट्री वाले और बिजनेसमैन कह रहे हैं कि सोयामील यानी खली ने तेल के सस्ते होने की राह में खल्ल दाल रखी है।
संयुक्त घटक से घाटा
सोयाबीन से तेल निकालने के बाद बचा शेष ठोस भाग खली या सोयामील कंपनी है। प्रोटीन से भरपूर होने के कारण सोयामील का उपयोग खाद्य पदार्थों में होता है। भारत से बड़ी मात्रा में सोयामील का जॉइंट वर्षों तक होता रहा है। तेल मिलें खाली को बेचकर भी मिलती है अच्छी कमाई।

सालभर से सोयामील यानि खली का पार्टनर लगभग न के बराबर रह गया है। तेल मिलों के अनुसार, तेल मिलों नेसोयाब की नौकरी कम कर दी है। उन्हें उत्पाद का खर्च तेल से ही बेचना पड़ता है। ऐसे में तेल महंगा है और तेल मिलें किसानों से लेकर सोयाबीन तक के सस्ते दामों पर इनसे इंकार कर रही हैं।
भारत की खाली नहीं बिक रही
तेल के उद्योग देश के प्रमुख संगठन साल्वेंट एक्सामॉलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार सोयाबीन इंडिया का उत्पादन बढ़ा है। सोयामील का प्रोडक्शन रिकॉर्ड 422 वैसल का प्रोडक्शन आ रहा है। ऐसे में कई देशों को भारत से सोयामिल यानी खाली कीमत चुकानी पड़ रही है।
तेल मिलें डेमोक्रेट में चल रही हैं तो सोयाबीन की क्रशिंग भी नहीं कर रही हैं। अभी जो तेल देश के उपभोक्ता खा रहे हैं, उनमें से अधिकतर आयातित तेल हैं। ऐसे में उनके दाम बनाए ही गए हैं क्योंकि सरकार ने रियायती दर बढ़ा दी है।
अंतिम मिले तो सस्ता होगा तेल
भारत का सोयामील (खली) अन्य देशों के टेलीकॉम 70 डॉलर महंगा लग रहा है। एकजुट मिलों ने उत्पाद बंद कर रखा है। ऐसे में सरकार की ओर से प्रोत्साहन के लिए कोई छूट की योजना या कम से कम फ्रेट यानि परिवहन खर्च पर रियायत दे तो खली का शामिल बढ़ाया जाएगा। डब्ल्यूटीआईओ के ग्रुप में 15 प्रतिशत रेटिंग या असंवैधानिकता बनी रहेगी। इस देश में सामान हो रहा है सोयाबीन की क्रशिंग शुरू हो जाएगी। किसानों को अच्छी डैम मिल और उपभोक्ताओं को तेल भी सस्ता मिलेगा। – डॉ. बीवी मेहता, मैथ्यू साल्वेंट एक्सामाइरिटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया



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