मुरैना में नलजल योजना में बहुत बड़ा घोटाला सामने आया है। नलजल योजना का भुगतान लेने के लिए किसानों ने फर्जी सीपेट रिपोर्ट तैयार की है। फर्म सीपेट रिपोर्ट वाली फर्मों के विभाग ने भी भुगतान कर दिया है। ख़ास बात यह है कि अब इस सुपरमार्केट को फिर से बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
द्वारा विकाश पांडे
प्रकाशित तिथि: मंगल, 19 नवंबर 2024 08:16:00 पूर्वाह्न (IST)
अद्यतन दिनांक: मंगलवार, 19 नवंबर 2024 08:16:00 पूर्वाह्न (IST)
पर प्रकाश डाला गया
- सीपेट ने लिखित पत्र-ईमेल पर औपचारिक रिपोर्ट से मिलान किया
- प्राचीन प्राचीन निरीक्षण रिपोर्ट की पुष्टि के लिए कोई भेंजे नहीं
- विभाग के इंजीनियरों ने लीपापोती की शुरुआत पूरी तरह से की
नईदुनिया प्रतिनिधि, स्थान। मुरैना में फर्जी सीपेट रिपोर्ट का मामला बड़ा घपला में सामने आया है। मुरैना मंडल में नल जल योजना के तहत काम करने वाली आठ फर्मों ने 15 कंपनियों के फर्जी सीपेट की रिपोर्ट दी है। कार्यपालन यंत्री ने अपने ईमेल पर विशेष सीपेट रिपोर्ट से मिलान किए बिना ही जोड़ों को लाखों का भुगतान कर दिया।
दुर्घटना करीब तीन-चार करोड़ का खतरा है। कार्यपालन मशीनरी ने सफाई दी है कि कुछ कंपनियों की रिपोर्ट फर्जी नहीं है, उनके कुछ पाइपों को सीपेट ने खारिज कर दिया था, जबकि कुछ फर्मों का कहना है कि उन्होंने सीपेट रिपोर्ट वाले पाइप का उपयोग ही नहीं किया है। कुल मिलाकर लीपापोती की तैयारी शुरू हो गई है।
असल में, असली वाले पाइप की कीमत अधिक होती है, इसके बाद सीपेट जांच भी होती है।

अधिक लाभ के चक्कर में चप्पल पाइप खरीदकर फर्ज़ी सीपेट रिपोर्ट में शामिल हैं, अवशेषी विभाग को चूना लगा रहे हैं। स्टूडेंट की साठगांठ से अब तक यह गेम हैडबॉल से चल रहा था, लेकिन अब इन फर्मों के नाम की सूची में मामला शामिल है।
इन फर्मों की सूची सीईई कार्यालय में प्रवेश
- रमाया रॉकेट चुंगी नाका रोड मुरैना
- मीरा धाकड़ सुजानखेड़ी जौरा मुरैना
- मां हर सिद्धी रेलवे कंपनी सुजानखेड़ी मुरैना
- पेज बंधन तिवारी केशव काली मुरैना
- दंडउटिया रेलवे कंपनी मुरैना
- सूरज शर्मा पत्रकारिता नगर मुरैना
- आर्यन आर्यन कंपनी जौरा मुरैना
- रावत कांट्रेक्टर मुरैना
किसी भी फर्म ने फर्जी सीपेट रिपोर्ट जारी की है, सभी को भुगतान किया गया जानकारी हमारे लिए मान्य है। ये कार्यपालन मशीनरी ही साइंटिक कि भुगतान किया गया है। मुख्य कारखाने के कार्यालय ने यह भी पूछा है कि इन फर्मों को कितना भुगतान किया गया है।
राकेश सिंह, अभिकरण यंत्री मुरैना मंडल
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मुरैना मंडल के कार्यपालन मशीनरी एसएल बाथम से सीधी बात
प्रश्न:-आपके यहाँ सबसे अधिक फ़र्ज़ी सीपेट की रिपोर्ट दी गई है?
उत्तर:-डिविजनल में 14 डिवीजन हैं, लेकिन केवल मेरे ही मंडल में जांच की गई है। साफ है मेरी नियत में कोई खोट नहीं है।
प्रश्न:-14 फर्मों की फ़र्ज़ी सीपेट रिपोर्ट पर आपकी क्या ज़रूरत है?
उत्तर उत्तर:-रामाया की रिपोर्ट फर्जी नहीं है, 730 मीटर पाइप टूटा था। जिस कंपनी ने इसे भी जोड़ा था। वहीं डेवलपर्स कंपनी को तो हमने उस कंपनी से पाइप्स के लिए लेटर ही नहीं लिखा है, सीपेट की रिपोर्ट लगी है। किसी ने उनका नाम फर्जी सीपेट रिपोर्ट बताकर संपादित किया है।
प्रश्न:-दंडौतिया और अन्य फर्म का भी नाम आया है?
उत्तर:-आर्यन और रामैया कंपनी का एक ऐसा ही मामला है, फर्जी सीपेट की रिपोर्ट नहीं लगी है। पनसुटिया फर्म की चार रिपोर्ट सीपेट ने प्रमाणित नहीं की है। फर्म का कहना है कि हमने सीपेट रिपोर्ट वाला पाइप का उपयोग ही नहीं किया। इसमें थर्ड पार्टी निरीक्षण के लिए कहा गया है। कैलादेवी और सन शर्मा फर्म ने भी फर्जी होने की सीपेट रिपोर्ट नहीं दी, बस उन्होंने पैसों के लिए भुगतान नहीं किया क्योंकि पाइप नहीं उठाया गया था।
प्रश्न:-ढांचा क्यों नहीं बनाया गया?
उत्तर:-अनुबंध में एफआइआर का कहीं उल्लेख नहीं है, लेकिन फिर भी हम पुलिस को पत्र लिखेंगे।





