पेशे से डाक्टर रायकवार का तैराकी में कोई नहीं सानी, 66 साल से तैर रहे, 78 स्वर्ण पदक जीते

डा. रायकवार ने बताया कि प्रतियोगिता में उन्होंने ब्रेस्ट स्ट्रोक, बैक स्ट्रोक और बटरफ्लाई 50 और 100 मीटर कैटेगरी में भाग लिया था। वहीं फ्री स्टाइल में 50, 100 और 200 मीटर प्रतिस्पर्धा थी। डा. रायकवार का बेटा और बेटी भी राष्ट्रीय स्तर के तैराक हैं। वह 1975 से तैराकी प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं।

By mukesh vishwakarma

Publish Date: Mon, 18 Nov 2024 01:58:27 PM (IST)

Up to date Date: Mon, 18 Nov 2024 02:02:28 PM (IST)

डॉ केसी रायकवार।

HighLights

  1. डा. केसी रायकवार ने डाक्टर मीट में जीते नौ पदक।
  2. प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी है।
  3. डॉक्टरों के साथ अंतरराष्ट्रीय तैराक बनकर बनाई पहचान

मुकेश विश्वकर्मा, नवदुनिया प्रतिनधि, भोपाल। उम्र 66 साल। पेशा डाॅक्टरी हुनर तैराकी। ये हैं डा. केसी रायकवार। जितना वह अपने काम के प्रति समर्पित हैं, उतना ही तैराकी के प्रति भी। शहर के अलावा प्रदेश और देशभर में हाेनी वाली ऐसी कोई तैराकी प्रतियोगिता हैं जिसमें डा. केसी रायकवार भाग नहीं लेते हों।

हाल ही में डा. केसी रायकवार ने जयपुर में आयोजित आल इंडिया डाक्टर स्पोर्ट्स मीटर में शानदार प्रदर्शन करते हुए नौ स्पर्धाओं में इनते ही पदक अपने नाम किए हैं। डा. केसी रायकवार इस साल जून में ही सेवानिवृत्त हुए हैं। पूर्व प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. केसी रायकवार ने 1979 बैच के चिकित्सक हैं।

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जब तैराकी करने जाते हैं तो युवा तैराक भी इनके आगे फीके दिखाई देते हैं। यह युवाओं को तैराकी की बारीकियों से अवगत कराते रहते हैं। केसी रायकवार के अलावा सवाई माधो सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में आयोजित इस मीट में देशभर के 278 डाक्टरों ने भाग लिया।

हालांकि मप्र में से कुल तीन डाक्टरों ने भाग लिया, जिसमें राजधानी से डा. रायकवार और डा. आराधना गुप्ता शामिल थे। इस दौरान डा. आराधना गुप्ता ने भी दो रजत पदक अपने नाम किए। डा. रायकवार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तैराकी में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने 2013 में जर्मनी में विश्व तैराकी प्रतिस्पर्धा में भाग लिया था। इसके बाद में एक बार नामीबिया में भी तैराकी कर चुके हैं।

विभिन्न स्तर पर जीत चुके है 155 पदक

अब तक वे विभिन्न प्रतियोगिता में 155 पदक जीत चुके हैं। खास बात यह है कि इसमें से 78 स्वर्ण पदक हैं। वहीं सिर्फ 18 बार ही वह तीसरे स्थान (कांस्य पदक) पर रहे। उन्होंने बताया कि बीते साल इन खेलों का आयोजन नासिक में हुआ था, तब उन्होंने 12 प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था और सभी में स्वर्ण जीते थे।