Beer Bottles: बीयर की पुरानी बोतलों में रिफिलिंग पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बरकरार रखी रोक

एक बीयर कंपनी ने अपनी बोतलों की रिफिलिंग को लेकर शिकायत की थी कि अन्य कंपनियां उनकी खाली बोतलों में अपना उत्पाद भरकर अपने ब्रांड के लेबल लगा रही हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बीयर की पुरानी बोतलों में रिफिलिंग पर रोक को बरकरार रखा है।

By Prashant Pandey

Publish Date: Solar, 17 Nov 2024 07:36:35 AM (IST)

Up to date Date: Solar, 17 Nov 2024 07:48:37 AM (IST)

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर। फाइल फोटो

HighLights

  1. बीयर कंपनी ने दी थी दलील, उनकी पुरानी बोतलों का उपयोग कर रही दूसरी कंपनी।
  2. पुरानी बोतलों में ही बीयर भरकर उसमें अपने ब्रांड का स्टीकर लगाकर बेची जा रही थी।
  3. मामले में हाईकोर्ट ने आबकारी आयुक्त द्वारा जारी किए गए आदेश को बरकरार रखा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर(MP Excessive Courtroom)। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आबकारी आयुक्त के आदेश को उचित ठहराते हुए बीयर की पुरानी बोतलों में रिफिलिंग पर रोक को बरकरार रखा है। प्रशासनिक न्यायाधीश संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

जिसने एकलपीठ के उस आदेश को अनुचित पाकर निरस्त कर दिया, जिसमें पुनर्विचार की व्यवस्था दी गई थी। अपीलकर्ता बीयर कंपनी की ओर से दलील दी गई कि उसकी कंपनी द्वारा बनाई जा रही बीयर की कांच की खाली और पुरानी बोतलों को दूसरी कंपनियों द्वारा रिफिल किया जा रहा है। यही नहीं, उस पर अपने ब्रांड के लेबल भी चस्पा कर दिए जाते हैं।

आबकारी आयुक्त ने पुरानी बोतलों में रिफिलिंग पर लगाई थी रोक

इस रवैये की तथ्यात्मक शिकायत के बाद आबाकारी आयुक्त ने पुरानी बोतलों की रिफिलिंग पर रोक लगा दी थी। इसके विरुद्ध एकलपीठ में याचिका दायर हुई थी। इसका निराकरण इस निर्देश के साथ कर दिया गया था कि आबकारी आयुक्त अपने आदेश पर पुनिर्विचार करें। कंपनी ने इसी आदेश को अपील के जरिए युगलपीठ में चुनौती दे दी।

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हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा को रखा बरकरार

एमपी हाई कोर्ट ने पनागर के बहुचर्चित हत्याकांड में अनिल केवट को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को उचित पाते हुए अपील निरस्त कर दी। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल व न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य शासन की ओर से अपील का विरोध किया गया।

दलील दी गई कि आखिरी बार आरोपित को मृतक के साथ देखा गया था और सभी साक्ष्य उसके विरुद्ध हैं। लिहाजा, सेशन कोर्ट द्वारा सुनाया गया फैसला दखल के लायक नहीं है। दरअसल, पनागर थानांतर्गत 13 सितंबर, 1999 में राजू नामक युवक की हत्या हुई थी।

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जांच में पुलिस ने पाया था कि पनागर स्टेशन के बाहर किसी बात पर हुए विवाद के चलते आरोपित अनिल केवट ने राजू के साथ मारपीट की थी और उसके बाद से राजू लापता था।

इस मामले में पुलिस द्वारा पेश की गई चार्जशीट पर विचारण के बाद जबलपुर जिला अदालत ने 22 अगस्त, 2000 को आरोपित अनिल को उम्र कैद की सजा सुनाई थी, जिसके विरुद्ध अपील दायर की थी।

यदि वेतन भुगतान नहीं किया तो ब्रांच मैनेजर को हाजिर होने देंगे निर्देश

हाई कोर्ट ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायसेन के ब्रांच मैनेजर को पूर्व आदेश के अंतर्गत याचिकाकर्ता को कर्मचारी को वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने साफ किया है कि आदेश का पालन न होने पर बैंक के ब्रांच मैनेजर को हाजिर होने के निर्देश दिए जाएंगे।

याचिकाकर्ता रायसेन निवासी रामचरण की ओर से अधिवक्ता अशोक चक्रवर्ती ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि हाई कोर्ट ने सात फरवरी, 2022 को आदेश दिए थे कि याचिकाकर्ता को वेतन भुगतान किया जाए। इस आदेश का पालन अभी तक नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता 1989 से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहा है।