ग्राम मंगला के पटवारी द्वारा गिरदावली में किसानों के बोये अनाज की मांग किया जाता है। आधा हिस्सा नहीं देने पर खेत को पड़त दर्ज कर दिया है जिससे वह दो साल से समर्थन मूल्य में धान नहीं बेच पा रहा है। किसान ने मामले में पटवारी के खिलाफ जांच को लेकर एसडीएम से गुहार लगाई है।
By Yogeshwar Sharma
Publish Date: Tue, 02 Jul 2024 12:40:18 AM (IST)
Up to date Date: Tue, 02 Jul 2024 12:40:18 AM (IST)
HighLights
- किसान ने बिल्हा एसडीएम से जांच कार्रवाई की लगाई गुहार
- पटवारी के पड़त भूमि लिखने के कारण धान नहीं बेच पा रहा
- एसडीएम को लिखित शिकायत कर जांच की मांग की
नईदुनिया न्यूज, बोदरी : ग्राम मंगला के पटवारी द्वारा गिरदावली में किसानों के बोये अनाज की मांग किया जाता है। आधा हिस्सा नहीं देने पर खेत को पड़त दर्ज कर दिया है जिससे वह दो साल से समर्थन मूल्य में धान नहीं बेच पा रहा है। किसान ने मामले में पटवारी के खिलाफ जांच को लेकर एसडीएम से गुहार लगाई है।
ग्राम पंचायत मंगला पासीद के पटवारी हल्का क्रमांक आठ में आशीष पांडेय के खिलाफ किसान रजनीश पांडेय ने एसडीएम को लिखे पत्र में बताया कि वह पिछले 10 साल से खेतों में धन की फसल बोते आ रहा है और खेतों से पैदावार हुई, धान को प्रतिवर्ष सहकारी सेवा समिति में समर्थन मूल्य पर बेचा भी करता था लेकिन बीते दो साल से पटवारी आशीष पांडे की नियुक्ति हुई है तब से पांच एकड़ खेत में बोए हुए धन को समर्थन मूल्य पर शासन को नहीं बेच पा रहा है। उसने बताया पटवारी द्वारा किसान के खेत में बोए हुए धान का आधा हिस्सा मांगे जाने से किसान द्वारा मना करने से उसके खेत को पड़त, सूखा बात कर गिरदावरी में गलत जानकारी दी गई है। इससे वह धान नहीं बेच पा रहा है।
किसान का कहना है कि जब खेत उसकी है धान बोया है तो पटवारी को अपने खेत में बोए हुए धन का आधा हिस्सा क्यों दें। इसी कारण से पिछले दो वर्षों से समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच पा रहा है। उसने बताया कि इस संबंध में उसने नायब तहसीलदार बिल्हा के बाद एसडीएम और कलेक्टर बिलासपुर को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई थी कि विभाग के अन्य अधिकारी खेतों की जांच करें। खेत में बोए हुए धन की (नरई) फसल के जड़ का हिस्सा अब तक बाकी है गांव के सभी लोग देखे हैं। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं की गई है। उसने बताया कि पटवारी की काल रिकार्डिंग भी मौजूद है। किसान ने बताया कि पटवारी द्वारा दूसरे के खेत को दूसरे के नाम पर चढ़ा दिया गया है इसकी त्रुटि सुधारने के लिए गांव के किसान पटवारी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन पटवारी बिना लेन-देन के कुछ भी काम करने को तैयार नहीं है।
पटवारी देता है गोलमोल जवाब
इस संबंध में जब पटवारी आशीष पांडेय को खेत दिखाया गया और पूछा गया कि जब बीते दस साल से किसान के खसरा नंबर में फसल बोया गया था तो उसे गिरदावरी में गलत क्यों दर्शाया तो वह गोल-मोल जवाब देता।



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