डीपी विप्र को यूजीसी से स्वायत्तता दर्जा प्राप्त: प्राचार्य डा.अंजू

डीपी विप्र को यूजीसी से स्वायत्तता दर्जा प्राप्त: प्राचार्य डा.अंजू

प्राचार्य डा. शुक्ला ने कहा कि हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा इस निर्णय का विरोध किया गया। कुलपति के इस व्यवहार से शिक्षा जगत, छात्रों और पालकों में निराशा और असंतोष फैल गया। कुलपति द्वारा यूजीसी के आदेश की अवहेलना और महाविद्यालय के उन्नयन में बाधा डालने के प्रयास से क्षेत्र में आक्रोश बढ़ गया है।

By Yogeshwar Sharma

Publish Date: Solar, 30 Jun 2024 01:38:10 AM (IST)

Up to date Date: Solar, 30 Jun 2024 01:38:10 AM (IST)

डा अंजू शुक्ला

नईदुनिया न्यूज, बिलासपुर। डीपी विप्र महाविद्यालय की प्राचार्य डा अंजू शुक्ला ने शनिवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि जनवरी 2023 में अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध डीपी विप्र महाविद्यालय को दूसरी बार राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रत्यायन परिषद, बैंगलोर द्वारा लगातार ‘ए‘ ग्रेड प्राप्त हुआ, जिससे यह छत्तीसगढ़ का एकमात्र निजी महाविद्यालय बन गया। इस उपलब्धि के बाद महाविद्यालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से स्वायत्तता का आवेदन किया, जिसे स्वीकृति मिल गई और 2024-2034 के लिए स्वायत्त महाविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ। यह छत्तीसगढ़ का पहला निजी महाविद्यालय है जिसे यह दर्जा मिला है।

प्राचार्य डा. शुक्ला ने कहा कि हालांकि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा इस निर्णय का विरोध किया गया। कुलपति के इस व्यवहार से शिक्षा जगत, छात्रों और पालकों में निराशा और असंतोष फैल गया। कुलपति द्वारा यूजीसी के आदेश की अवहेलना और महाविद्यालय के उन्नयन में बाधा डालने के प्रयास से क्षेत्र में आक्रोश बढ़ गया है। यूजीसी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुलपति ने महाविद्यालय को स्वायत्तता देने के आदेश का पालन नहीं किया और अनुशासनहीनता का प्रदर्शन किया। इसके अलावा कुलपति ने अवैधानिक तरीके से महाविद्यालय को स्वायत्तता के निर्णय को रोकने के लिए कदम उठाए। छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा विभाग ने इस मामले की जांच के बाद एक सरकारी प्रतिनिधि नियुक्त किया है। डीपी विप्र महाविद्यालय ने सभी संविधिक निकायों के लिए प्रतिनिधियों का नामांकन कर दिया है, परन्तु विश्वविद्यालय ने अभी तक नामांकन नहीं किया है, जिससे महाविद्यालय के स्वायत्तता के प्रयासों में बाधा उत्पन्न हो रही है। यूजीसी के नियमों के अनुसार, आदेशों की अवहेलना करने पर विश्वविद्यालय का अनुदान रोका जा सकता है। कुलपति के इन प्रयासों से विश्वविद्यालय के अनुदान पर रोक लग सकती है, जिससे क्षेत्र के शिक्षा जगत को अपूरणीय क्षति हो सकती है। डीपी विप्र महाविद्यालय ने छात्रों को श्रेष्ठतर शिक्षा प्रदान करने का संकल्प लिया है और यह क्रम जारी रहेगा। इस अवसर पर शशि निकाय की वरिष्ठ सदस्य रामकुमार अग्रवाल सहित कई प्राध्यापक मौजूद रहे।