मप्र हाई कोर्ट बार को ही वहन करना होगा बिजली का बिल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यथास्थिति रखें कायम

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन पर 94 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया है। एसोसिएशन की यह मांग है कि इस बिल को राज्य सरकार को भरना चाहिए। बार एसोसिएशन हाई कोर्ट में हारने के बाद सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर यथास्तिथि को कायम कर दिया है।

By Anurag Mishra

Publish Date: Fri, 28 Jun 2024 04:41:51 AM (IST)

Up to date Date: Fri, 28 Jun 2024 04:41:51 AM (IST)

मप्र हाई कोर्ट बार को ही वहन करना होगा बिजली का बिल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यथास्थिति रखें कायम
मप्र हाई कोर्ट बार के बिजली बिल का सुप्रीम कोर्ट में चल रहा मामला। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने बार एसोसिएशन याचिका को कर दिया था निरस्त।
  2. राज्य शासन ने कहा- अधिवक्ता संघ का बिजली बिल भरने की नहीं कोई नीति।
  3. सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन लड़ रहा केस।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के बिजली बिल रिकवरी प्रकरण में यथास्थिति कायम रखने की व्यवस्था दी है। इस अंतरिम निर्देश के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा व न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की युगलपीठ ने राज्य शासन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। मामले की अगली सुनवाई समान प्रकृति के अन्य लंबित प्रकरणों के साथ की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट ने 3 मई 2024 को हाई कोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन, जबलपुर की उस याचिका को निरस्त कर दिया था, जिसके माध्यम से बिजली आपूर्ति विच्छेद करने और बिल वसूली को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया था कि अधिवक्ता संघों को आवंटित जगहों का बिजली बिल उन्हें ही वहन करना होगा।

राज्य शासन ने भी दलील दी थी कि उनके पास ऐसी कोई नीति नहीं है, जिसके तहत वह अधिवक्ता संघों को बिजली बिल में छूट प्रदान करें। सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने पक्ष रखा।

2014 तक राज्य शासन ने उठाया था बिजली का खर्चा

सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने दलील दी कि हाई कोर्ट बार एसोसिएशन का 94 लाख रुपये बिजली बिल लंबित है। कायदे से विधि विभाग, मप्र शासन को बिजली खर्च वहन करना चाहिए। वर्ष 2014 तक अधिवक्ता संघों के बिजली बिल का खर्चा राज्य शासन ही उठाता था। कालांतर में कई संघों ने भी यह सुविधा दिए जाने मांग की, जिसके चलते सुविधा बंद कर दी गई। दरअसल, बार एसोसिएशन में वकीलों के अलावा पक्षकार भी आते हैं। लिहाजा, उन्हें यह छूट मिलनी चाहिए।