MP Information: बाल अपचारियों को ही नहीं, अब वयस्कों को भी सुनाई जाएगी सामुदायिक सेवा की सजा

अभी तक बाल अपचारियों को ही छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा की सजा सुनाई दी जाती थी। भारतीय न्याय संहिता में अब से वयस्कों को भी छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा की सजा सुनाई जाएगी। इस पहल से जेल में कैदियों की संख्या कम होगी।

By Anurag Mishra

Publish Date: Fri, 28 Jun 2024 01:25:42 AM (IST)

Up to date Date: Fri, 28 Jun 2024 01:25:42 AM (IST)

MP News: बाल अपचारियों को ही नहीं, अब वयस्कों को भी सुनाई जाएगी सामुदायिक सेवा की सजा
कोर्ट का फाइल फोटो।

HighLights

  1. पांच हजार से कम की चोरी, नशे के मामलों में मिलेगी सजा।
  2. भारतीय न्याय संहिता में 2 से 12 महीने तक सामुदायिक सजा का प्राविधान।

अजय गुप्ता, नईदुनिया, भोपाल। अब तक बाल अपचारियों के छोटे अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा सुनाई जाती थी, लेकिन अब बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) में वयस्कों द्वारा किए जाने वाले छोटे अपराधों के लिए भी इस तरह की सजा का प्राविधान किया है।

बीएनएस में एक नई सजा सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) को बकायदा सजा के रूप में शामिल किया है। एक जुलाई से लागू होने जा रही नई संहिता बीएनएस में धारा 4(च) में सामुदायिक सेवा की सजा जोड़ी गई है।

भूतपूर्व न्यायाधीश अनिल ठाकरे के अनुसार इसके पीछे जेलों में कैदियों की संख्या में कमी लाना और छोटे अपराध सुधार का मौका देना भी एक उद्देश्य है, इसलिए सामुदायिक सेवा की सजा को कानूनी दर्जा दिया है। नई संहिता की धारा 23 में सामुदायिक सेवा की सजा को परिभाषित कर लिखा है कि न्यायालय किसी दोषी को सामुदायिक सेवा की सजा भुगतने का आदेश दे सकता है, जिससे लोगों को लाभ है। इस सजा में दोषी को कोई मेहनताना नहीं मिलेगा। सामुदायिक सेवा में किसी स्वयंसेवी संस्था के लिए काम करना, किसी सामुदायिक संस्था के साथ काम करना, साफ-सफाई करना, सार्वजनिक स्थान से कचरा उठाना या फिर कुछ ऐसा काम करना जिससे जनता की भलाई हो सके।

नशा कर हंगामा करने पर सामुदायिक सेवा की सजा

पांच हजार रुपये से कम कीमत की संपत्ति की चोरी करने पर अगर किसी को पहली बार दोषी ठहराया जाता है, तो संपत्ति लौटाने पर उसे सुधरने का मौका देते हुए न्यायाधीश सामुदायिक सेवा की सजा दे सकता है। इसी तरह यदि कोई व्यक्ति नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर हंगामा करता है, तो ऐसा करने पर उसे 24 घंटे की जेल या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों या फिर सामुदायिक सेवा की सजा मिल सकती है।

ये भी नियम

धारा 202 में कोई भी सरकारी सेवक किसी तरह के कारोबार में शामिल नहीं हो सकता है। अगर, वह ऐसा करते हुए दोषी पाया जाता है तो उसे 1 साल की जेल या जुर्माना या दोनों या फिर सामुदायिक सेवा करने की सजा मिल सकती है। इसी तरह न्यायालय के समन पर अगर कोई आरोपी या व्यक्ति पेश नहीं होता है तो अदालत उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों या फिर सामुदायिक सेवा की सजा सुना सकती है।

धारा 226 में अगर कोई व्यक्ति किसी सरकारी सेवक की काम में बाधा डालने के मकसद से आत्महत्या की कोशिश करता है, तो एक साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों या फिर सामुदायिक सेवा की सजा दी जा सकती है।

धारा 356 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति बोलकर, लिखकर, इशारे से या किसी भी तरीके से दूसरे व्यक्ति की प्रतिष्ठा और सम्मान को ठेस पहुंचाता है, तो मानहानि के कुछ मामलों में दोषी को 2 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों या फिर सामुदायिक सेवा की सजा दी जा सकती है।

कितने समय की होगी सजा

भारतीय न्याय संहिता के मुताबिक, अगर किसी अपराध में जुर्माना या सामुदायिक सेवा की सजा का प्रविधान है, तो जुर्माना ना देने पर सामुदायिक सेवा की सजा दी जाएगी। अगर, जुर्माने की रकम पांच हजार है तो दो महीने सेवा करनी होगी। 10 हजार का जुर्माना होने पर चार महीने तक सेवा करनी होगी। कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें एक साल तक सामुदायिक सेवा करने की सजा दी जा सकती है।