Bhopal Information: बाल अपचारियों को ही नहीं अब व्यस्कों को भी सुनाई जाएगी सामुदायिक सेवा की सजा
धारा 356 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति बोलकर, लिखकर, इशारे से या किसी भी तरीके से दूसरे व्यक्ति की प्रतिष्ठा और सम्मान को ठेस पहुंचाता है तो मानहानि के कुछ मामलों में दोषी को 2 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों या कम्युनिटी सर्विस की सजा दी जा सकती है।
By Praveen Malviya
Publish Date: Thu, 27 Jun 2024 04:48:04 PM (IST)
Up to date Date: Thu, 27 Jun 2024 04:48:04 PM (IST)
HighLights
- मानहानि के साधारण मामलों में दी जा सकेगी सामुदायिक सेवा की सजा
- भारतीय न्याय संहिता में दो से 12 महीने तक सामुदायिक सजा का प्रविधान
- पांच हजार से कम की चोरी, नशा वाले भी सामुदायिक सेवा की सजा
अजय गुप्ता, भोपाल। अब तक बाल अपचारियों के छोटे अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा सुनाती थीं। लेकिन अब बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) में व्यस्कों द्वारा किए जाने वाले छोटे अपराधों के लिए भी ऐसा प्रविधान किया गया है। बीएनएस में एक नई सजा सामुदायिक सेवा (कम्युनिटी सर्विस) को बकायदा दंड के रूप में शामिल किया गया है।
एक जुलाई से लागू होने जा रही नई सहिता बीएनएस में धारा 4(च) में ” सामुदायिक सेवा की सजा जोड़ी गई है।भूतपूर्व न्यायाधीश अनिल ठाकरे की माने तो इसके पीछे जेलों में कैदियों की संख्या में कमी लाना और छोटे अपराध सुधार का मौका देना भी एक उद्देश्य है। इसलिए सामुदायिक सेवा की सजा को कानूनी दर्जा दिया गया है।
नई संहिता की धारा 23 में सामुदायिक सेवा की सजा को परिभाषित कर लिखा गया है कि न्यायालय किसी दोषी को सामुदायिक सेवा की सजा भुगतने का आदेश दे सकता है। जिससे लोगों को लाभ है। इस सजा में दोषी को कोई मेहनताना नहीं मिलेगा। सामुदायिक सेवा में किसी स्वयंसेवी संस्था के लिए काम करना, किसी सामुदायिक संस्था के साथ काम करना, साफ-सफाई करना, सार्वजनिक स्थान से कचरा उठाना या फिर कुछ ऐसा काम करना जिससे जनता की भलाई हो सके।
पांच हजार से कम की चोरी पर दी जा सकेगी सामुदायिक सेवा की सजा
पांच हजार रुपये से कम कीमत की संपत्ति की चोरी करने पर अगर किसी को पहली बार दोषी ठहराया जाता है तो संपत्ति लौटाने पर उसे सुधरने का मौका देते हुए न्यायाधीश सामुदायिक सेवा की सजा दे सकता है।
इसी तरह यदि कोई व्यक्ति नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर हुड़दंग मचाता है तो ऐसा करने पर उसे 24 घंटे की जेल या एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों या फिर सामुदायिक सेवा की सजा मिल सकती है।
धारा 202 में कोई भी सरकारी सेवक किसी तरह के कारोबार में शामिल नहीं हो सकता. अगर वो ऐसा करते हुए दोषी पाया जाता है तो उसे 1 साल की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा या फिर कम्युनिटी सर्विस करने की सजा मिल सकती है।
धारा 209: न्यायालय के समन पर अगर कोई आरोपी या व्यक्ति पेश नहीं होता है तो अदालत उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा या कम्युनिटी सर्विस की सजा सुना सकती है।
धारा 226 में अगर कोई व्यक्ति किसी सरकारी सेवक की काम में बाधा डालने के मकसद से आत्महत्या की कोशिश करता है तो एक साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों या फिर कम्युनिटी सर्विस की सजा दी जा सकती है।
कितने समय की होगी ये सजा
भारतीय न्याय संहिता के मुताबिक, अगर किसी अपराध में जुर्माना या सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान है तो जुर्माना न देने पर सामुदायिक सेवा की सजा दी जाएगी। अगर जुर्माने की रकम पांच हजार है तो दो महीने सेवा करनी होगी, 10 हजार का जुर्माना होने पर चार महीने सामुदायिक सेवा करना होगा। कुछ मामलों ऐसे भी है जिनमें एक साल तक सामुदायिक सेवा करने की सजा भी हो सकती है।

