Bilaspur Courtroom Information : एक न्यायिक अफसर को अधिकतम तीन साल की मिलेगी प्रतिनियुक्ति

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्थानांतरण नीति बनाने के साथ ही इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। उन न्यायिक अधिकारियों को राहत दी गई है जिनके पति या पत्नी, बच्चा या माता-पिता या कोई अन्य प्रथम श्रेणी का रिश्तेदार कैंसर, किडनी फेल्योर जैसी लाइलाज बीमारियों से पीड़ित हैं, जिसके लिए डायलिसिस की आवश्यकता होती है, या जिनकी हाल ही में ओपन हार्ट सर्जरी हुई है।

By Yogeshwar Sharma

Publish Date: Thu, 27 Jun 2024 12:42:07 AM (IST)

Up to date Date: Thu, 27 Jun 2024 12:42:07 AM (IST)

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बनाई स्थानांतरण नीति, तत्काल प्रभाव से किया लागूनईदुनिया न्यूज, बिलासपुर।

नईदुनिया न्यूज, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने न्यायिक अफसरों के लिए स्थानांतरण नीति बनाने के साथ ही इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। प्रमुख बात ये कि एक न्यायिक अफसर को जो प्रतिनियुक्ति पर है या किसी पूर्व-कैडर पद पर है, तीन साल पूरा करने के बाद मूल विभाग में वापस आना होगा। इसके बाद प्रतिनियुक्ति का दोबारा अवसर नहीं दिया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि नए न्यायिक अफसरों को तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद ही प्रतिनियुक्ति पर विचार किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्थानांतरण नीति बनाने के साथ ही इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। उन न्यायिक अधिकारियों को राहत दी गई है जिनके पति या पत्नी, बच्चा या माता-पिता या कोई अन्य प्रथम श्रेणी का रिश्तेदार कैंसर, किडनी फेल्योर जैसी लाइलाज बीमारियों से पीड़ित हैं, जिसके लिए डायलिसिस की आवश्यकता होती है, या जिनकी हाल ही में ओपन हार्ट सर्जरी हुई है। ऐसे अधिकारी को उस स्थान पर पदस्थापना की प्राथमिकता दी जा सकती है जहां या उसके निकट इन बीमारियों के लिए उचित उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके लिए संबंधित अफसर को जिला मेडिकल बोर्ड से चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। प्रमाण पत्र के साथ ही संबंधित जिला न्यायाधीश द्वारा प्रमाणित करने के बाद इस पर विचार किया जाएगा। न्यायिक अधिकारियों का वार्षिक स्थानांतरण प्रत्येक वर्ष 15 मार्च तक किया जाएगा। अप्रैल के पहले दिन तक कार्यभार ग्रहण करने का समय दिया जाएगा, ताकि शैक्षणिक सत्र के साथ ताल मेल बैठाया जा सके। किसी स्थान पर पदस्थापना का सामान्य कार्यकाल तीन वर्ष होगा। यह नियम व शर्त प्रधान जिला न्यायाधीशों पर लागू नहीं होगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि एक न्यायिक अधिकारी का एक स्थान पर पदस्थापना के सामान्य कार्यकाल के बाद, उसे उसके पदस्थापना स्थान से स्थानांतरित कर दिया जाएगा और उसकी अगली पोस्टिंग एक अलग श्रेणी के स्थान पर होगी। यदि किसी कारण से यह संभव नहीं है, तो उच्च न्यायालय उसे उसी श्रेणी में किसी स्थान पर पदस्थ कर सकता है।

जनवरी में शुरू होगी स्थानांतरण प्रक्रिया

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पालिसी को समय पर और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए, स्थानांतरण प्रक्रिया हर साल जनवरी के महीने में शुरू होगी। कैलेंडर वर्ष का 31 मार्च, तीन वर्षों के सामान्य पदस्थापना कार्यकाल की गणना की तारीख होगी। बीच में किसी न्यायिक अधिकार का स्थानांतरण होता है तो ऐसी स्थिति में छह महीने या उससे अधिक की अवधि को एक वर्ष गिना जाएगा। नवनियुक्त न्यायिक अधिकारी या किसी ऐसे पद पर तैनात न्यायिक अधिकारी को किसी दूसरे गैर-न्यायिक पद पर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि वह कम से कम तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा ना कर ले।

ए वर्ग में प्रदेश के 10 न्यायिक क्षेत्र

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पदस्थापना के लिए न्यायिक जिलों को चार श्रेणियों में बांटने के अलावा ए बी सी व डी वर्ग में विभाजित कर दिया है। एक वर्ग में प्रदेश के 10 प्रमुख न्यायिक क्षेत्र को शामिल किया गया है। रायपुर ,दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, अंबिकापुर, रायगढ़, कोरबा, भिलाई, धमतरी व जगदलपुर। इसी तरह बी श्रेणी में 20, सी श्रेणी में 20 व डी श्रेणी में 29 न्यायिक क्षेत्र को शामिल किया गया है।