Mamta Chandrakar: विवादों में घिरीं खैरागढ़ इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की कुलपति ममता चंद्राकर बर्खास्त
छत्तीसगढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति पद्मश्री ममता मोक्षदा चंद्राकर (Mamta Chandrakar) को राज्यपाल ने बर्खास्त कर दिया। राज्यपाल बिस्वभूषण हरिचंदन ने उनके खिलाफ विश्वविद्यालय अधिनियम 1956 की धारा 17-ए के तहत कार्रवाई की है। नए कुलपति की नियुक्ति तक दुर्ग संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर को विश्वविद्यालय का प्रभार दिया गया है।
By Sandeep Tiwari
Publish Date: Sat, 22 Jun 2024 07:50:21 AM (IST)
Up to date Date: Sat, 22 Jun 2024 07:50:46 AM (IST)
HighLights
- पद्मश्री ममता मोक्षदा चंद्राकर को राज्यपाल ने किया बर्खास्त
- नियुक्ति और राज्यपाल के आदेश का उल्लंघन करने का मामला
- विश्वविद्यालय अधिनियम 1956 की धारा 17-ए के तहत की गई कार्रवाई
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया/रायपुर। छत्तीसगढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति पद्मश्री ममता मोक्षदा चंद्राकर (Mamta Chandrakar) को राज्यपाल ने बर्खास्त कर दिया। राज्यपाल बिस्वभूषण हरिचंदन ने उनके खिलाफ विश्वविद्यालय अधिनियम 1956 की धारा 17-ए के तहत कार्रवाई की है। जानकारों के अनुसार इस धारा के तहत राजभवन के आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाती है। ममता संभवत: राज्य की पहली कुलपति होंगी जिनके खिलाफ इस धारा के तहत कार्रवाई हुई है।
नए कुलपति की नियुक्ति तक दुर्ग संभागायुक्त सत्यनारायण राठौर को विश्वविद्यालय का प्रभार दिया गया है। ममता को भूपेश सरकार ने 2020 में कुलपति बनाया था। उनकी नियुक्ति को लेकर शुरु से ही विवाद चल रहा था। उनके खिलाफ राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षक बीआर यादव ने सत्याग्रह कर मोर्चा खोल रखा था। उन्होंने कुलपति हटाओ, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय बचाओ के बैनर तले अनशन किया।
यादव का आरोप था कि राजभवन द्वारा जारी विज्ञापनों के अनुसार कुलपति के पद पर नियुक्त होने वाला व्यक्ति अकादमिक होना चाहिए और संबंधित के पास प्राध्यापक पद पर 10 वर्षों का अनुभव अनिवार्य है, लेकिन ममता के पास एक भी दिन का अनुभव नहीं है। इसके पहले स्थानीय निवासियों ने भी काली पट्टी बांधकर मशाल रैली निकाली थी। ममता की नियुक्ति के विरोध में खैरागढ़ बंद कर विरोध प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद राज्यपाल के सचिव ने कुलपति को तत्काल पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया।
राजभवन के निर्देश पर भी अमल नहीं
अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा राजभवन के निर्देशों का लगातार पालन नहीं किया जा रहा था। पूर्व कुलपति डा. मांडवी सिंह अवकाश पर जाना चाहती थीं, कुलपति ने उन्हें अनुमति नहीं दी। राजभवन ने निर्देश दिया कि मांडवी सिंह को अनुमति दी जाए मगर आदेश का पालन नहीं हुआ। इसके अलावा राजभवन की ओर से किए जा रहे पत्राचार पर भी सही तरीके से जवाब नहीं दिया जा रहा था।
विश्व में विख्यात है विश्वविद्यालय
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की स्थापना खैरागढ़ रियासत के 24वें राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्यावती देवी ने 14 अक्टूबर 1956 को की थी। इस विश्वविद्यालय में नेपाल, भूटान, श्रीलंका, ईरान, अफगानिस्तान, मलेशिया, सूडान, इराक जैसे देशों से विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

