MP Information: प्रदेश सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी पर सीधी भर्ती, पदोन्नति की प्रतीक्षा में पीजीएमएओ कोटा बढ़ाने से नाराज
मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों के 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती करने जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2022 के बाद से पदोन्नति के लिए ग्रेडेशन लिस्ट ही तैयार नहीं की है। इस कारण इसके बाद पात्र पीजीएमओ के नाम ही नहीं हैं। वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे स्नातकोत्तर चिकित्सा अधिकारी (पीजीएमओ) नाराज हैं।
By Neeraj Pandey
Publish Date: Thu, 20 Jun 2024 05:26:41 AM (IST)
Up to date Date: Thu, 20 Jun 2024 05:26:41 AM (IST)
HighLights
- प्रदेश में 888 विशेषज्ञों की भर्ती में मात्र 388 मिले
- विशेषज्ञों की 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती
- पदोन्नति की प्रतीक्षा में 800 से अधिक पीजीएमएओ, कोटा बढ़ाने से बढ़ी नाराजगी
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया. भोपाल : प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी को देखते हुए सरकार ने पहली बार 2022 में इसके 888 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी, पर 388 डॉक्टर्स ने ही पदभार ग्रहण किया। ऐसे में सरकार ने विशेषज्ञों की सीधी भर्ती का कोटा पिछली कैबिनेट बैठक में 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। इस कारण वर्षों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे स्नातकोत्तर चिकित्सा अधिकारी (पीजीएमओ) नाराज हैं।
विशेषज्ञों की 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती
लगभग 850 पीजीएमओ पदोन्नति की राह देख रहे हैं, पर सरकार विशेषज्ञों के 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती करने जा रही है। पीजीएमओ को विशेषज्ञ बनने के लिए एमडी-एमएस की डिग्री वाले को दो वर्ष और डिप्लोमा वाले को कम से कम तीन वर्ष तक सेवा देनी होती है। यह अवधि पूरी कर चुके पीजीएमओ की संख्या 800 से अधिक है। इनमें आर्थाेंपेडिक्स, नाक-कान एवं गला और नेत्र विभाग में काम कर रहे पीजीएमओ तो लगभग आठ वर्ष से पदोन्नत नहीं हो पाए हैं।
पदोन्नति के लिए ग्रेडेशन लिस्ट ही तैयार नहीं की
दूसरी गड़बड़ यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2022 के बाद से पदोन्नति के लिए ग्रेडेशन लिस्ट ही तैयार नहीं की है। इस कारण इसके बाद पात्र पीजीएमओ के नाम ही नहीं हैं। सबसे बड़ा अन्याय सेवारत पीजीएमओ के साथ हो रहा है। वर्ष 2019 के बाद से उनकी ग्रेडेशन लिस्ट ही तैयार नहीं की गई है। ऐसे में 400 से अधिक सेवारत पीजीएमओ का 2019 के बाद से प्रमोशन ही नहीं हो पाया है। इनमें वह डाक्टर शामिल हैं जिन्होंने विभाग में सेवा देते हुए एमडी-एमएस की डिग्री पूरी की है।

